अपनी बिंदास, बेलौस और खनकती आवाज से संगीत प्रेमियों के दिलों  को जीत चुके अभिजीत भट्टाचार्य इन दिनों बेरोजगार हैं और काम न मिलने की खुन्नस वे सोशल मीडिया में ऊटपटांग बयानबाजी व महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर के निकाल रहे हैं. इस बाबत उन पर कई पुलिस केस भी चल रहे हैं फिर भी उन का बड़बोलापन कम नहीं हो रहा. बहरहाल, अभिजीत कहते हैं, ‘‘आज भी उन का संघर्ष जारी है.’’ पिछले दिनों पटना में प्रोग्राम देने पहुंचे इस अजीम फनकार का सब से बड़ा दर्द है कि आज पब्लिक के मनमिजाज को ध्यान में रख कर गीत बनाए जा रहे हैं, जिस से उन गानों में न मिठास होती है और न ही वे टिकाऊ होते हैं. आज के ज्यादातर गाने आयारामगयाराम की तरह होते हैं. किसी भी तरह से गाने को हिट बनाने की कोशिश की जाती है, पर लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि जब गाने में सुर, संगीत और मिठास ही नहीं होगी तो वह हिट हो ही नहीं सकता है.

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