भारत ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानि एनएसजी की सदस्यता को अपनी नाक का सवाल बना लिया था. केन्द्र सरकार को यह लग रहा था कि भारत के एनएसजी में शामिल होने से उसकी ताकत केवल दुनिया भर में ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि देश के अंदर भी सरकार के पक्ष में माहौल बन सकेगा. केन्द्र सरकार ने इसी कारण अपनी पूरी ताकत लगा दी थी. मनोविज्ञान कहता है कि जिस काम के करने में जितनी ताकत लगती है, उसके ना होने पर निराशा भी उतनी ही ज्यादा होती है.

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