आज तो हद ही हो गई. दुर्गा प्रसाद की आज हिम्मत इतनी बढ़ गई कि उस ने मुझे जोर से एक मुक्का मारा और सामने के 2 दांत हिला दिए. यह रोज का किस्सा होने लगा था. नल में रोज पानी नहीं आता था और जब नगर निगम का टैंकर आता था, तब से महल्ले वाले तो पानी के लिए लाइन में लग जाते थे, पर ये दुर्गा प्रसाद लोगों से लड़ कर लाइन के आगे पहुंच जाता था. सिर्फ मुझ से ही नहीं, औरों से भी लड़ाई करता था. लोग डरते सिर्फ इसलिए थे कि वह कलैक्टर औफिस में काम करता था. वक्तबेवक्त हो सकता है कि काम पड़ जाए.

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