हमारा जमाना अभी बहुत पीछे नहीं छूटा है. फकत 50-60 साल पीछे चले जाओ. आप को पुराने फैशन के नैरो या बेलबौटम पतलूनशर्ट, घाघराचोली धारी युवकयुवतियां यानी ‘प्री जींस’ युग के जीव मिल जाएंगे. ये लोग प्रेम के दीवाने होते थे. कालेज की सीढि़यों पर पांव रखे नहीं कि स्टेटस सिंबल बनाए रखने के लिए एक अदद ‘पे्रमी’ या ‘प्रेमिका’ की जरूरत महसूस होने लगती थी. जो लोग ‘स्टेटस’ की पहुंच से दूर रह जाते थे या स्टेटस पा सकने में, किसी तकनीकी, आर्थिक व सामाजिक कारण विशेष के चलते अक्षम होते थे, वे ‘एकतरफा मुहब्बत’ का रोग लगा बैठते थे.

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