ज्यों ही मेरे सिर में अचानक सफेद बाल दिखा, धर्मभीरुओं ने दांव मिलते ही उपदेश देते कहा, ‘‘हे माया के मोह में पड़ अपने परलोक को भूले मेवालाल, खतरे की घंटी बजनी शुरू हो गई है. संभल जा. सिर के बालों में एकाएक सफेद बाल उग आने का मतलब होता है कि…सो, अब मोहमाया की गली के फेरे लगाने छोड़, ईश्वर से नाता जोड़. ऐसा न हो कि यहां का खाया भगवान ऐसे निकाले कि सात जन्म तक खाना ही भूल जाए. चल, अब शाकाहारी हो जा.’’

मैं ने उन्हें समझाते कहा, ‘‘हे भगवान से डरने वालो, अभी मेरे खाने के दिन हैं. देखो, सिर तो सिर, सिर से पांव तक हुए सफेद बाल वाले कितने बैठे हैं जो मोहमाया में अभी भी कैसे फिट हैं? मैं तो जिस कुरसी पर बैठा हूं उस पर सोएसोए भी कमाने के दिन हैं. जनता की जेब तो मैं तब तक काटना बंद नहीं करने वाला जब तक मेरे गले में माला पहना मुझे मेरे औफिस वाले घर नहीं धकिया देते.’’

अचानक, पता नहीं कैसे मेरा हृदय परिवर्तन हो गया और मैं साहब के चरणों को छोड़, भगवान के चरणों की खोज करने लगा. और, मैं सब को गुमराह करने वाला खुद ही गुमराह हो चला.

हमारे दंभी जीवन में एक दौर ऐसा भी आता है जब हम औरों को गुमराह करतेकरते अपने दंभ के परिणामस्वरूप खुद को ही गुमराह करने लग जाते हैं. और हमें पता ही नहीं चलता. दिमाग में पता नहीं कहां से सड़ा विचार बदबू मार गया और मुझे अनदेखे परलोक की चिंता होने लगी. मेरे मायाग्रस्त दिमाग में पता नहीं बिन खादपानी ईश्वर के प्रति आस्था का पौधा कैसे पनपने लगा. वैसे, परलोक की चिंता में धर्म के धंधेबाज रहते हैं और तब ही जानलेवा बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं.

जवानी में कोई मौत के बारे में सोचे तो उसे गधे से अधिक कुछ और मत मानिए. जवानी के दिन तो मौज मनाने के दिन होते हैं, मर्यादाओं को अंगूठा दिखाने के दिन होते हैं, भगवान को गच्चा दे अपने को ठगने और औरों को ठगाने के दिन होते हैं.

धर्म की मार्केटिंग इतनी जबरदस्त है कि उस में गच्चा खा कर मैं औफिस के खानपान को छोड़ औफिसटाइम के बीचबीच में भगवान को ढूंढ़ने निकल पड़ता, यह सोच कर कि अगर उस से जरा संवाद हो जाए तो बंदा भवसागर पार हो जाए. भगवान के चक्कर में प्रेमिका के चक्कर से भी अधिक राख छान मारी पर वे निकले ऐसे जैसे हाईकमान किसी रुष्ट नेता से नहीं मिलना चाहता तो नहीं मिलना चाहता. जब भगवान कहीं नहीं मिले तो मैं उदास हो उठा. तब महल्ले के एक नामीगिरामी, पहुंचे हुए विषय वासनाओं से पूर्ण भगवाई बिचौलिए ने बातोंबातों में समझाया, ‘‘हे प्रभु दीवाने, भगवान सीधे किसी से नहीं मिलते. मध्यस्थ की मध्यस्थता बहुत जरूरी है.’’

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‘‘मीडिएटर बोले तो…’’

‘‘बाबाजी.’’

‘‘मतलब?’’

‘‘भगवान को पाने का हर रास्ता आज भी वैसे ही बाबाओं की गली से हो कर जाता है जैसे आत्मा के स्वर्ग का रास्ता जीव के मरने के बाद पंडों के पिछवाड़े से हो कर जाता है.’’

‘‘तो?’’

‘‘तो क्या, जो भगवान से साक्षात्कार करना चाहते हो तो किसी पहुंचे हुए बाबा से तुरंत संपर्क करो. तुम चाहो, तो मेरी नजर में भगवान से साक्षात्कार करवाने वाला एक बाबा है.’’

‘‘उस का नंबर है आप के पास क्या?’’ मैं ने उन के चरण पकड़े तो वे अदब से बोले, ‘‘यह लो, नोट करो.’’ और मैं उन से बाबा का नंबर ले गदगद हुआ.

बड़ी कोशिश के बाद बाबाजी से संपर्क हुआ, तो वे डकारते बोले, ‘‘क्या बात है वत्स?’’

‘‘सर, आप के माध्यम से भगवान के दर्शन करना चाहता हूं.’’

‘‘भगवान बोले तो?’’

‘‘गौड, अल्लाह, ईश्वर के दर्शन करवा देंगे?’’

‘‘पहले यह लो भगवान का बैंक अकाउंट नंबर. और इस में 5 हजार एक सौ रुपए जमा करवा दो.’’

‘‘भगवान का अकाउंट नंबर? ब्लैक मनी के आने के चक्कर में भगवान ने भी अपना बैंक अकाउंट खुलवा लिया?’’ मैं ने अपनी सोच जाहिर की.

‘‘हां, धन की जरूरत किसे नहीं, भक्त? धन है तो भजन है. धन है तो मन है. धन समस्त सृष्टि का आधार है. धन के बिना जीव निराधार है. धन के बिना भगवान बिन चमत्कार है. धन के बिना हर घरगृहस्थी ही नहीं, सरकार से ले कर बाबा तक बीमार है.’’

‘‘मतलब?’’

‘‘धन हर सोच का मूल है. धन है तो आग भी कूल है. धन है तो शूल भी फूल है.’’

‘‘तो?’’

‘‘अभी किस का बना माल खाते हो?’’

‘‘मतलब?’’

‘‘स्वदेशी या विदेशी?’’

‘‘विदेशी.’’

‘‘स्वदेशी क्यों नहीं? क्या भारतीय नहीं हो?’’

‘‘विशुद्ध भारतीय ही हूं. पर स्वदेशी का रिस्क लेने से डरता हूं.’’

‘‘पाप, घोर पाप, विदेशी खानेपहनने वाले को हमारे भगवान के घर में कोई जगह नहीं. जाओ, पहले धर्म बदल कर आओ, फिर हम से फोन पर जबान लड़ाओ.’’

‘‘फोन लगाया, बाबा, ऐसा न कहो? हूं तो भारतीय मूल का ही मैं, पर भीगी बिल्ली सा कुछ बना.’’

‘‘तो, जो भगवान पाना चाहते हो, तो पहले हमारी कंपनी के स्वदेशी प्रोडक्ट अपनाओ.’’

‘‘भगवान से मिलवाने के धंधे में कमाई कम हो गई क्या, जो अब आप माल भी बेचने लगे?’’

‘‘हम माल नहीं बेचते. भक्तों का कल्याण बेचते हैं. अपने माल से उन में शुद्ध विचार भरते हैं. ऐसा कर उन्हें करतार यानी भगवान के करीब करते हैं. असल में काफी बोझ के बाद हम ने महसूस किया कि भगवान को पाने का सरल रास्ता हमारे बने प्रोडक्टों से हो कर ही गुजरता है.’’

‘‘मतलब? जो आप के प्रोडक्ट खाएगा, करतार को केवल वही पाएगा?’’

‘‘हां, शतप्रतिशत. हमारे बनाए प्रसादरूपी और्गेनिक प्रोडक्टों के सेवन से दूसरे बाबाओं के खाए प्रोडक्टों की अपेक्षा जल्दी तुम अपने भगवान से साक्षात्कार कर सकते हो, हरि ओम, हरि ओम.’’

‘‘मतलब, आज तभी सब बाबा मठ छोड़, बाजार में डटे हैं?’’

‘‘डटना पड़ता है. यह माया महाठगिनी है. इस के मोहपाश से तो भगवान भी नहीं बच पाए और हम तो…और केवल एक प्रोडक्ट से आज किसी की दुकान चली है भला? हर कस्टमर की मांग के हिसाब से हरेक का भगवान लीगली या इल्लीगली रखना ही पड़ता है. इसलिए, पहले मेरे प्रोडक्ट इस्तेमाल करो, फिर करतार से मिलने की बात करो.’’

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‘‘माफ करना, बाबा, पहले जो बाबा भगवान को कब्जाने के लिए जाने जाते थे, आज क्या वे बाजार को हथियाने की फिराक में नहीं दिखते? बाबा, बाजार और करतार का आपस में यह क्या संबंध है? जबकि बाजार बाजार है और करतार करतार.’’

‘‘बाजार और करतार का आपस में वही संबंध है जो जीव का परमात्मा से है.’’

‘‘कैसे?’’

‘‘हमारे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से तन का मैल साफ हो जाता है, पापी. जिसजिस ने हमारे बने प्रोडक्टों का इस्तेमाल किया वह तन से भगवान के शर्तिया करीब हुआ.’’

‘‘मन से क्यों नहीं?’’

‘‘मन किसी के पास हो, तभी तो वह मन से करतार पाए. अब तन है तो तन से ही काम चलाना पड़ेगा न?’’

‘‘मतलब, आप के प्रोडक्टों के इस्तेमाल के बिना मैं तन से भगवान नहीं पा सकता?’’

‘‘नहीं, बिलकुल नहीं. साहस हो तो आजमा कर देख लो. परम सत्य है, असल में जब पैसे वाला जीव भौतिक सुखसाधनों से ऊब जाता है, तब ही वह भगवान के चरणों में जा कर गिड़गिड़ाता है. और रुपैयाछाप भक्त उसे त्यागी कह एक  बार फिर धोखा खा जाते हैं. और बाजार में हम जैसे कुछ और चादर बिछा डालते हैं.’’

‘‘हां, ताकि कम से कम गृहस्थियों का पैसा माया से युक्त बाबाओं के पास रहे और…वे समानांतर व्यवस्था चलाएं, सरकार तक को अपने इशारे पर नचाएं. इसीलिए आज हर बाबा बाजार में कुछ न कुछ पेश कर सुधबुध खोए तुम जैसे नास्तिकों के उद्धार के लिए साबुन से ले कर सीडी तक हाथ में लहराता खड़ा है.’’

‘‘हर किस्म के करतार को पाने का रास्ता बाजार से हो कर ही गुजरता है, पुत्र. इसलिए, पहले मेरी दुकान में आ और उस का द्वार पार कर अपना मनवांछित आराध्य पा. यह ले रिंकलफ्री क्रीम. दिमाग में लगा और दिमाग में मोह से पड़ी सारी झुर्रियां हटा. तभी तेरा आगे का रास्ता साफ होगा. ले मेरी पिंपलफ्री क्रीम. चेहरे पर लगा और करतार को अपना सनशाइन चेहरा दिखा, उस का फेवरिट हो जा.’’

वे यह सब कह ही रहे थे कि तभी मुझे लगा, कहीं और से मेरे जैसा उन का भक्त उन से फोन पर संपर्क करना चाह रहा था. सो, मेरा उन का संपर्क टूटा. करतार के नाम पर एक बंदा फिर ठगने से छूटा कि नहीं, यह तो करतार ही जाने.

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