सोडा बेस्ड ड्रिंक्स को हम खुद से दूर नहीं कर पाते. वैसे तो सोडा बेस्ड ड्रिंक्स हमें तुरंत तरोताजा महसूस करवाते हैं लेकिन सोडा शरीर के अंदरूनी अंगों के लिए बेहद नुकसानदेह है, इससे किडनी और लिवर को घातक नुकसान पहुंचता है. इसका हमारी प्रजनन क्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. सोडा बेस्ड सॉफ्ट ड्रिंक्स की बॉटल और कैन सस्ते प्लास्टिक और मेटल से बने होते हैं, ऐसे में नियमित रूप से इन ड्रिंक्स का सेवन करने से प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है. प्लास्टिक बॉटल बनाने के लिए जिन केमिकल्स का इस्तेमाल होता है उससे हार्मोन समस्याएं उत्पन्न होती हैं और महिलाओं में मिस्कैरेज का रिस्क बढ़ने के साथ फर्टिलिटी भी घट जाती है.

कमजोर पाचन तंत्र

आपको जानकर हैरानी होगी कि बहुत सी सोडा कंपनियां सामान्य नल के पानी का इस्तेमाल करती हैं. जिसमें ढेरों बैक्टीरिया और कीटाणु होते हैं. एक रिसर्च के मुताबिक, इस तरह के पानी में लेड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है जो इंसान के शरीर के लिए हानिकारक है और पाचन तंत्र को पूरी तरह से कमजोर कर देता है.

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किडनी और लिवर को खतरा

बहुत सी सोडा बेस्ड सौफ्ट ड्रिंक्स में फौस्फारिक एसिड की मात्रा ज्यादा होती है और डौक्टरों की मानें तो इस तरह के ड्रिंक्स लिवर और किडनी को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं. अगर लंबे समय तक और नियमित तौर पर इन ड्रिंक्स का सेवन किया जाए तो गुर्दे संबंधी बीमारियां और किडनी स्टोन होने का खतरा रहता है.

मोटापे का खतरा

एक रिसर्च के मुताबिक, हर दिन सोडा बेस्ड ड्रिंक्स का सेवन करने से मोटापे का खतरा 1.6 गुना बढ़ जाता है.

कमजोर दांत और मसूड़े

नियमित रूप से सोडा के सेवन से करीब 92 प्रतिशत वयस्कों को दातों में सड़न की समस्या होती है. सोडा में इस्तेमाल एसिड दांत के इनैमल को कमजोर कर देता है, नतीजतन दांत सड़ जाते हैं. इसके अलावा सोडा में मौजूद चीनी की अधिक मात्रा की वजह से भी दांतों में समस्या और सड़न हो जाती है.

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अस्थमा का खतरा

सोडा बेस्ड ड्रिंक्स में अक्सर सोडियम बेन्जोनेट नाम के प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल होता है जो ड्रिंक्स में बैक्टीरिया की ग्रोथ और पेय पदार्थ को सड़ने से बचाता है. मेडिकल साइंस के मुताबिक, इस प्रिजर्वेटिव की वजह से अस्थमा होने का खतरा होता है.

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