मनुष्य का पाचन तंत्र यानी ज़ुबान से ले कर मलद्वार तक बहुत बड़ी संख्या में सूक्ष्मजीवों से भरा हुआ है, जिनसे भोजन को पचाने में मदद मिलती है. इन सूक्ष्मजीवियों को जीवाणु कहते हैं. हमारे पेट में अच्छे जीवाणुओं के संग कई ऐसे जीवाणु भी होते हैं जिनसे पेट के रोग होने की आशंकाएं होती हैं. ऐसे में डॉक्टर प्रोबायोटिक फ़ूड का समर्थन करते हैं जो बुरे जीवाणुओं को ख़त्म करने के साथ-साथ पाचन तंत्र में फ्लोरा व्यवस्थित करने और हानिकारक जीवाणुओं के प्रसार पर भी नियंत्रण करता है.

कई बार लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवा देने के बाद डॉक्टर अपने पेशेंट को प्रोबायोटिक लेने का परामर्श देते हैं. दरअसल लंबी बीमारी के दौरान सहयोगी यानी अच्छे जीवाणुओं का क्षय हो जाता है, जिसका सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है. इसे जैव सुरक्षित खाद्य यानी बायोप्रोटेक्टिव फूड के ज़रिये ठीक किया जाता है.

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अच्छे बैक्टीरिया भोजन को पचाने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने, पोषक तत्वों को सोखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं.

प्रोबायोटिक को अच्छा बैक्टीरिया भी कहा जाता है. अगर गलत खाने या एंटिबायोटिक के इस्तेमाल की वजह से शरीर में ज्यादा खराब बैक्टीरिया घुस जाते हैं तो संतुलन बिगड़ने से पूरा शरीर प्रभावित होता है. ऐसा कहा जाता है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता आंतों में है. अगर आंत की हालत सही है तो हमारे शरीर को रोगों से लड़ने में आसानी होती है.

अक्सर लोग पाचन से जुड़ी तकलीफों का रोना रोते रहते हैं. पेट दर्द, कब्ज़, गैस, डकार, पथरी, अल्सर, कोलाइटिस जैसी समस्याएं हमारी छोटी और बड़ी आंत में रहने वाले बैक्टीरिया में हुए असंतुलन या किसी बाधा की वजह से शुरू होती हैं. ज्यादा तनाव, क्लोरीनयुक्त पानी पीने से, ज्यादा मीठा या जंक फूड खाने से और एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से आंतों पर बुरा असर पड़ता है, जिससे पेट की बीमारियां पैदा होने लगती हैं. खाने में प्रोबायोटिक को शामिल करके इन समस्याओं से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है.

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