कमरदर्द गंभीर बीमारियों का एक भयानक संकेत है. पर हम में से कितने कमर और अन्य भागों के दर्द को यह जानते हुए भी गंभीरता से लेते हैं कि यह खतरे की घंटी है और अन्य गंभीर बीमारियों के अलावा कैंसर का भी लक्षण हो सकता है? कैंसर की गिनती आज भी जानलेवा बीमारियों में होती है. यह खून के माध्यम से हड्डियों तक पहुंचता है और सब से आसानी से पीडि़त होती हैं रीढ़ की हड्डियां. कमर के निचले हिस्से का दर्द भी कैंसर का एक आरंभिक लक्षण हो सकता है.

कमरदर्द बहुत तकलीफदेह हो और हमेशा रहता हो तो यह रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर का मामला हो सकता है. कुछ कैंसर ऐसे हैं जिन के आरंभिक चरण में उन्हें सामान्य कमरदर्द से अलग करना कठिन होता है. इसलिए इस तरह के दर्द में यह जांच करवा लेने में बुद्धिमानी है कि मामला कैंसर का तो नहीं.

दर्द और कैंसर

कमरदर्द के कई कारण हैं, जैसे गलत मुद्रा में बैठना जिस से मांसपेशियों में दर्द, डिस्क की समस्या, संक्रमण, आघात, और यहां तक कि रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर हो सकता है. हालांकि कैंसर, शुरू में कमरदर्द के रूप में सामने आ सकते हैं.

रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर होने से कमरदर्द इसलिए होता है क्योंकि हड्डी का आकार बड़ा हो जाता है या वर्टीब्रा (रीढ़ का जोड़) में फ्रैक्चर हो जाता है. यह देखा गया है कि ज्ञात या अज्ञात कैंसर के 80 प्रतिशत मरीजों में यह हड्डियों तक फैल जाता है. चौंकाने वाली बात यह है कि 36 प्रतिशत मामलों में तो कोई लक्षण भी नहीं होता. यह सामान्य कमरदर्द के रूप में मौजूद हो सकता है जो कि ऐसे मरीजों में कैंसर का सब से आम लक्षण है. कुछ कैंसर आसानी से रीढ़ की हड्डियों तक फैल सकते हैं, जैसे स्तन कैंसर, फेफड़े का कैंसर, किडनी का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, मल्टीपल मायलेमा, लिम्फोमा, पेटआंत के कैंसर और सर्वाइकल कैंसर. चिकित्सक इस प्रकार के दर्द का कारण जानने के लिए आमतौर पर एमआरआई कराते हैं जिस से शरीर संरचना संबंधी विकृतियां ही सामने आती हैं. हालांकि जरूरी है कैंसर की जड़ तक पहुंचना ताकि इलाज की सही योजना बनाई जाए. इस का एक ही रास्ता है – कैंसर का पता लगाने के लिए जांच, जिस से किसी व्यक्ति के शरीर के किसी हिस्से में कैंसर होने का पता चलता है.

लाइलाज नहीं कैंसर

हम में बहुत से लोग यह मान बैठे हैं कि कैंसर लाइलाज है जबकि सच यह है कि समय से बीमारी का पता चले तो इस का इलाज सफल हो सकता है. आमतौर पर विभिन्न प्रयोगशालाओं और संस्थानों में होने वाली संपूर्ण शरीर स्वास्थ्य जांच को जनजन जांच अभियान का रूप दिया गया है जिस का मकसद कम शुल्क पर प्रभावी स्वास्थ्य जांच है और एक बड़ी आबादी को इस का लाभ देने का लक्ष्य रहता है. इन जांचों में बीमारी पकड़ने के लिए सामान्यतया कम सैंसिटिविटी और विवरण होते हैं. भारत में संपूर्ण शरीर स्वास्थ्य जांच के दायरे में आते हैं, फेफड़े का कैंसर, मल में ओकल्ट ब्लड, खून की सूक्ष्मदर्शी जांच, पेशाब की सूक्ष्मदर्शी जांच, पेट का अल्ट्रासाउंड, स्तन की मैमोग्राफी आदि.

अल्ट्रासाउंड आमतौर पर हाल में स्नातक की डिगरी प्राप्त चिकित्सक करते हैं जिन्हें मरीज की हिस्ट्री नहीं पता होती और इसलिए उन्हें कुछ संदिग्ध नहीं लगता. इन जांचों के परिणामों की विश्वसनीयता की अपनी सीमा होती है.

जांच कराएं पता लगाएं

कैंसर का पता लगाने के लिए पूरे शरीर का पीईटी एमआरआई एक बहुत ही विशेषज्ञता की जांच है. एफडीजी आधारित इस जांच में भूखे पेट मरीज के शरीर में रेडियो लेवल ग्लूकोज मोलेक्यूल की सूई दी जाती है. इस से शुरू होती है ग्लूकोज हासिल करने के लिए असामान्य कोशिकाओं की सामान्य कोशिकाओं से प्रतिस्पर्धा. नतीजतन, शरीर में होने वाली असामान्य गतिविधियों का पता चल जाता है जिस की पुष्टि उस हिस्से की व्यापक एमआरआई जांच से कर ली जाती है जिस से, यदि बीमारी हुई तो उस के स्वरूप और फैलाव का पता चल जाता है.

किसी गंभीर बीमारी का लक्षण किसी व्यक्ति को महसूस होने या पता लगने वाला संकेत है जो अन्य लोग आसानी से नहीं देख सकते हैं. अगर आप को भी ऐसा ही कोई लक्षण महसूस हो तो नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं क्योंकि दर्द को नजरअंदाज करने से स्वास्थ्य की कुछ गंभीर, बल्कि जानलेवा समस्याएं भी हो सकती हैं. यदि दर्द और तकलीफ लंबी अवधि तक परेशान करे तो इसे हलके में न लें और रोकथाम के उपाय अवश्य करें. चिकित्सक से सलाह ले कर रोकथाम के उपाय करें ताकि कोई अनहोनी न हो जाए.

क्यों होता है कमरदर्द

–       जब जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ता है.

–       नियमित अभ्यास की कमी से शरीर की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं.

–       लंबे अंतराल तक एक ही जगह काम करना.

–       आगे की ओर झुक कर चलना या बैठना.

–       हाईहील की सैंडल ज्यादा प्रयोग करना.

–       डिप्रैशन से भी मांसपेशियों में तनाव आ जाता है.

कमरदर्द से कैसे बचें

–       स्वस्थ जीवनशैली, पोषक खानपान और कैल्शियम, विटामिन डी की खुराक.

–       सही तरीके से शारीरिक मुद्रा में उठनाबैठना.

–       मोटापे पर पूरी तरह नियंत्रण.

–       पैरों को आराम पहुंचाने वाले फुटवियर, जो बहुत ऊंची हील के न हों, पहनें.

–       हैवी ऐक्सरसाइज और भारी सामान को झटके से न उठाएं.

–       लगातार या लंबे समय तक बैठें या लेटें नहीं.

कमरदर्द के साइड इफैक्ट

किडनी से जुड़े इन्फैक्शन, संक्रमण, स्पाइनल ट्यूमर, बैकबोन में इन्फैक्शन आदि.

 

– शुभम सोगानी

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