कविता और उस के पति निर्मेष अब अकेले रहते हैं क्योंकि बेटे को उन्होंने होस्टल में पढ़ने भेज दिया है. दोनों की नौकरियां अच्छी हैं पर कविता को हर समय डर लगता है कि वह घर बंद करना या कोई खिड़की बंद करना भूल न गई हो. कई बार वह काम पर जाते हुए 2-4 किलोमीटर जा कर लौटती कि सब दरवाजे चैक कर लें. जब निर्मेष टूर पर होते तो उसे हर समय डर लगता कि कोई घर में घुस जाएगा, वह बारबार सारे कमरों में  झांक कर खिड़कियां चैक करती.

यह एक मानसिक रोग है, जिसे औब्सेसिव कम्पलसिव डिसऔर्डर या आम भाषा में  झक एवं सनक भी कहते हैं. यह एक आम समस्या है एवं बहुत लोगों में आमतौर पर देखने को मिलती है. यह रोग समाज में जितना माना जाता है, उस से कहीं अधिक पाया जाता है. ऐसा इस वजह से होता है क्योंकि व्यक्ति अपने इस रोग को दूसरे लोगों से सामाजिक भय की वजह से छिपाता है कि कहीं उस पर पागलपन का ठप्पा न लग जाए.

जब तक यह रोग नियंत्रित रहता है या कम मात्रा में होता है तब तक इसे मनोवैज्ञानिक समस्या मान लिया जाता है. जब यह एक सीमा से अधिक बढ़ जाता है, तब ऐसी स्थिति में यह व्यक्ति के लिए बड़ा ही कष्टकारी होता है एवं उस के लिए काम करना व जीवन जीना दूभर हो जाता है. ऐसे में यह बीमारी का रूप ले लेता है, जिसे मानसिक रोग कहते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है.

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