सिविल हॉस्पिटल लखनऊ में टेस्टिंग डिपार्टमेंट में कार्यरत राजकमल उदास स्वरों में कहते हैं, 'कोरोना ने मेरे हट्टे कट्टे दोस्त को तीन दिन में निगल लिया. वो मेरे साथ कोविड टीम का हिस्सा था. जिम जानेवाला, स्पोर्ट का शौक़ीन, सेहत के प्रति सतर्क और हमेशा हंसमुख दिखने वाले मेरे दोस्त ने कोरोना टेस्ट टीम का हिस्सा बन कर कितने ही लोगों में जीने की उम्मीद जगाई और खुद तीन दिन में सबकी उम्मीदें ख़त्म करके चला गया. पता ही नहीं चला कि कब कोरोना ने उसके फेफड़ों में पहुंच कर उसके श्वसन तंत्र को बुरी तरह जकड़ लिया. एक दिन तेज़ बुखार, दूसरे दिन खांसी और तीसरे दिन सांस में दिक्कत के साथ उसकी इहलीला ख़त्म हो गयी.'

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