मलेरिया खून की एक बीमारी है जो प्लाजमोडियम पैरासाइट के कारण होती है. यह एक खास तरीके के मच्छर के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है. यह गंभीर बीमारी है, कभीकभी यह बहुत घातक साबित होती है. यह एक ऐसे संक्रमित मच्छर के काटने से पैदा होती है जो अपनी लार में मलेरिया पैरासाइट को ले कर चलता है.

यह पूरी तरह रोकथाम और इलाज योग्य मच्छरजनित बीमारी है. मलेरिया के संदिग्ध रोगी का इलाज जल्द से जल्द मैडिकल निगरानी में किया जाना चाहिए. अगर किसी में मलेरिया की पुष्टि होती है तो उस का इलाज बहुत जरूरी है.

सामान्य तौर पर इस का इलाज किसी अयोग्य व्यक्ति से नहीं कराया जाना चाहिए. कभी भी मलेरिया होने पर ओझा, गुनिया, तांत्रिक या भगतों के पास न जाएं. इलाज के दौरान दवाएं बीच में छोड़ना खतरनाक हो सकता है. इस के अलावा खाली पेट मलेरिया की दवाएं नहीं खानी चाहिए.

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मलेरिया पैरासाइट एक सूक्ष्म जीव है जिसे प्लाजमोडियम के नाम से जाना जाता है और यह प्रोटोजोन्स के नाम से जाने जाने वाले छोटे जीवों के एक समूह से जुड़ा है. मच्छर की वह प्रजाति जो मलेरिया पैरासाइट को ढोने का काम करती है, एनोफिलीज कहलाती है. इसे मलेरिया वेक्टर्स कहा जाता है. यह एनोफिलीज मच्छर खासकर सुबह व शाम के वक्त काटता है. बरसात के मौसम के दौरान और उस के ठीक बाद यह चरम पर होता है. यह उस समय भी पैदा हो सकता है जब कम प्रतिरोधक क्षमता के लोग मलेरिया के फैलाव वाले सघन क्षेत्रों में जाते हैं. 

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