राधा की योनि से लगातार 6 महीनों से स्राव होने के साथसाथ उस में खुजली होती रही. पति के साथ संबंध बनाते वक्त उसे दर्द होता. पेशाब करने के वक्त उसे परेशानी होती. उस ने डाक्टर से संपर्क किया. जांच के बाद डाक्टर ने बताया कि उसे ट्राइकोमोनियासिस बीमारी हो गई है. पढ़ेलिखे होने के बावजूद अधिकांश महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट्स की देखभाल के प्रति गंभीर नहीं होतीं.

महिला-पुरुषों में स्पष्ट शारीरिक भिन्नता होती है. स्त्रियों में प्राइवेट पार्ट्स का योनि, गर्भाशय व गर्भनली के माध्यम से सीधा संबंध होता है. पतिपत्नी के बीच शारीरिक संबंध दोनों के जीवन का सुखकारी समय होता है. किंतु कई बार महिलाओं में प्रसव, मासिक धर्म व गर्भपात के समय भी संक्रमण होने का डर होता है.

ट्राइकोमोनियासिस का इलाज मैट्रोनीडाजोल नामक दवा से होता है जो खाई जाती है और जैल के रूप में लगाई भी जाती है लेकिन डाक्टर की सलाह पर ही दवा लें.

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अशिक्षा, गरीबी, शर्म के कारणों से अकसर महिलाएं प्राइवेट पार्ट्स के रोगों का उपचार कराने में आनाकानी करती हैं. प्राइवेट पार्ट्स के संक्रमण से एड्स जैसा खतरनाक रोग भी हो सकता है.

कौपर टी लगवाने से भी प्राइवेट पार्ट्स में रोग के पनपने की आशंका रहती है.  ‘क्लामाइडिया’ रोग ट्राइकोमेटिस नामक जीवाणु से हो जाता है. यह रोग ‘मुख मैथुन’ और ‘गुदामैथुन’ से जल्दी फैलता है. कई बार इस बीमारी से संक्रमण गर्भाशय से होते हुए फेलोपियन ट्यूब तक फैल जाता है. इस में जलन होती है. समय पर उपचार नहीं होने पर एचआईवी होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

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