आज के दौर में हर क्षेत्र का मशीनीकरण हो रहा है. यहां तक कि अब तो इंसान की जिंदगी को भी मशीन की संज्ञा दी जाने लगी है कि फलां की जिंदगी मशीन बन कर रह गई है. दिनरात में 24 ही घंटे होते हैं, तब भी और अब भी. लेकिन मौजूदा भागमभाग भरी जिंदगी और लोगों की बदलती जीवनशैली के चलते इंसान के पास समय नहीं बच पा रहा है. इंसान सोचता है कि काश, दिनरात के घंटे 24 से ज्यादा हो जाते...

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