इन दिनों पूरे देश में हिंदी बनाम अंगरेजी पर बहस चल रही है. एक तबका मान रहा है कि अंगरेजी बोलने वाले हर लिहाज से हर काम में बेहतर होते हैं जबकि दूसरा तबका कहता है कि हिंदीभाषी भी किसी से कम नहीं होते. यहां दूसरे तबके की बात करें तो ग्लास्गो कौमनवैल्थ में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले इस की बेहतर मिसाल हैं जो पहले तबके की बात को सिरे से झुठला रहे हैं.

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