पालक के बाद मेथी दूसरी पत्तेदार या भाजी वाली फसल है, जिस की खेती पूरे देश में की जाती है. मेथी की गिनती मसालेदार फसलों में होती है और इस का इस्तेमाल दवाएं बनाने में भी होता है. मेथी गुणों से भरपूर होती है. इसलिए इस की मांग साल भर बनी रहती है. मेथी में प्रोटीन काफी मात्रा में पाया जाता है. इस में सूक्ष्म तत्त्व भी मौजूद होते हैं. यह विटामिन सी के अलावा विटामिन के का भी अच्छा जरीया है. आयुर्वेद में मेथी का गुणगान जम कर किया जाता है. यह बात नाशक है और कफ हटाती है. गर्भवती औरतें इस का सेवन करें, तो गर्भाशय ठीक रहता है और दूध भी ठीकठाक बनता है. मेथी सर्दियों की खास फसल है. अब तो इस के तरहतरह व्यंजन भी बनने लगे हैं. मेथी के लड्डू सेहत बनाने वाले होते हैं, जो अब मिठाई की दुकानों पर भी मिलने लगे हैं. कई बीमारियों और जाड़ों में मेथी खाने की सलाह दी जाती है. आइए जानें कि कैसे मेथी की वैज्ञानिक तरीके से खेती कर के ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है.

मिट्टी और जलवायु

मेथी की खेती के लिए कम तापमान और औसत बारिश वाले इलाके सही होते हैं. यह पाले को दूसरी फसलों के मुकाबले ज्यादा बरदाश्त कर लेती है, इसलिए पंजाब, राजस्थान, दिल्ली सहित तमाम उत्तरी सूबों में इस की खेती कामयाबी से की जाती है. दक्षिण भारत में भी इसे सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है, लेकिन ज्यादा बारिश वाले इलाकों में इस की खेती नहीं की जा सकती. दक्षिण भारत में यह खरीफ की, जबकि उत्तरी भारत में रबी की फसल है.

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