लेखक-प्रो. रवि प्रकाश मौर्य

बहुत समय से अदरक का इस्तेमाल मसाले के रूप में, सागभाजी, सलाद, चटनी और अचार व अलगअलग तरह की भोजन सामग्रियों के बनने के अलावा तमाम तरह की औषधियों के बनाने में होता है. इसे सुखा कर सौंठ भी बनाई जाती है. आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, सोहांव, बलिया के अध्यक्ष प्रोफैसर रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि बागों की भूमि का उपयोग अदरक की खेती के लिए कर सकते हैं. मिट्टी व खेत की तैयारी उचित जल निकास वाली दोमट या रेतीली दोमट भूमि इस की खेती के लिए अच्छी होती है. जुताई कर के मिट्टी को भुरभुरी व समतल कर लेना चाहिए. बोआई का समय जहां पर सिंचाई की सुविधा हो, वहां इस की बोआई अप्रैल के मध्य पखवारे से मई महीने तक करनी चाहिए. किस्में व अवधि अदरक की उन्नत किस्में सुप्रभा, सुरुचि, सुरभि वगैरह हैं, जो 200 से 225 दिनों में तैयार हो जाती हैं.

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