फरवरी में सर्दी के तेवर ढीले पड़ने से पिछले महीनों से ठंडाए किसान काफी राहत और सुकून महसूस करते हैं. फरवरी के मध्यम मौसम में किसानों को हर घड़ी बीमार पड़ जाने का खौफ नहीं रहता और वे खुल कर काम करने की हालत में रहते हैं. जनवरी में तो किसानों का ज्यादा वक्त आग तापते ही बीतता है. कंबल पर कंबल लादने के बाद भी बदन सर्दी से सुन्न बना रहता है, मगर फरवरी की फिजा और आबोहवा तनबदन में चुस्तीफुरती भरने वाली होती है.

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