एक मल्टीनैशनल कंपनी में कार्यरत सुधीर का ट्रांसफर घर से दूर वड़ोदरा शहर में हो गया. उस ने इस शहर के बारे में सुना तो बहुत था लेकिन उसे यहां आने का अवसर कभी नहीं मिला था. कोई परिचित भी यहां नहीं रहता कि मन को थोड़ी तसल्ली हो जाती. दिल्ली से वड़ोदरा पहुंच कर उस ने अपना नया औफिस जौइन कर लिया. घर से औफिस और औफिस से घर, यही उस की दिनचर्या बन गई. साप्ताहिक अवकाश बिताना उस के लिए भारी पड़ने लगा. क्या किया जाए, कब तक ऐसा चलेगा, अपना शहर भी इतना पास नहीं कि भाग कर घर चला जाए और परिवार से मिल आए. यह सब सोच कर वह परेशान रहने लगा. ऐसी स्थिति किसी के लिए भी उत्पन्न हो सकती है. दिनचर्या व्यवस्थित हो जाए और आप बोर भी न हों, इस के लिए निम्न उपाय अपना सकते हैं :

Tags:
COMMENT