लेखक- नीरज कुमार मिश्रा

मैनेजर ने आंखें सिकोड़ीं, मानो वो बिना बताए ही सबकुछ समझने की कोशिश कर रहा था.‘‘अरे साहब, कोई जरूरी नहीं कि वह बच्चा अब भी यहां हो या उसे कोई आ कर गोद ले गया हो... इतने साल पुरानी बात आप आज क्यों पूछ रहे हैं... हालांकि मुझे इस बात से कोई लेनादेना नहीं है... पर, अब पुराने रिकौर्ड भी इधरउधर हो गए हैं... और फिर हम किसी अजनबी को अपनी कोई जानकारी भला दे भी क्यों?‘‘ मैनेजर ने अपनी हथेली खुजाते हुए कहा.

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