Temple Donation Scam: राममंदिर हो या कोर्ई और मंदिर, जहां भी पता चल रहा है कि चंदा चोरी हो रहा है, समझ लें कि जिम्मेदार वह सरकार ही है जो वास्तव में आम जनता को भक्त बना बना कर तीर्थों, मंदिरों, नदियों के तटों, पहाडिय़ों, आश्रमों में धकेल रही है. सरकार का उद्देश्य यह है कि लोग इन जगह जाएं, चंदा चढ़ाएं ताकि उस की आमदनी का लाभ सत्ताधारी पार्टी और उस के कार्यकर्ताओं को मिले.

भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचारों में अब लाखों लोग लगने लगे हैं जो होर्डिंग लगाते हैं, झंडे लगाते हैं, बसों में भर कर आम लोगों को नेताओं के चरणचुंबन के लिए लाते हैं, मिर्ची वाले भाषण सुनने के लिए उन के  कई दिन बरबाद करते हैं. सवाल उठता है कि इस सब के लिए पैसा कहां से आता है? यह मंदिरों से आता है. मंदिरों में रखी हुंडियों और मूर्तियों में भक्तों द्वारा पैसा फेंका जाता है. उस के अलावा, बहुत सा पैसा उन फूल, डलिया, श्रृंगार का सामान बेचने वालों, चप्पलजूते रखने वालों, चायपकौड़ी बेचने वालों, ढाबों से वसूला जाता है जो मंदिरों के आसपास खरपतवार की तरह लगे होते हैं.

भारतीय रेलें इस में बड़ी सेवाएं कर रही हैं. अपनी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाने वाले को चाहे सीट न मिले, बहन के विवाह पर गांव लौटने वाले को टिकट और जगह न मिले, सरकारी नौकरी या सरकारी कालेज में प्रवेश के लिए होने वाली परीक्षा में जाने की लिए ट्रेन के बुकिंग न हो लेकिन तीर्थों के लिए रेलवे तैयार है, मुस्तैदी के साथ.

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