Woman Murder Mystery: अहमदाबाद के वटवा स्थित कुतुबनगर में 28 मार्च की सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब क्राइम ब्रांच की टीम एक पुराने और लंबे समय से बंद मकान के सामने पहुंची. पुलिस के साथ मजदूर, फावड़ेकुदाल और जेसीबी मशीन भी थी. आसपास के लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर पुलिस इस मकान की खुदाई क्यों कराने आई है.

दरअसल, क्राइम ब्रांच को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि मकान नंबर 10 की जमीन के नीचे करीब 34 साल पहले एक महिला की हत्या कर उस की लाश दफना दी गई थी. सूचना बेहद पुरानी थी. न कोई शिकायत थी, न हत्या का रिकौर्ड और न ही कोई लाश. फिर भी इंसपेक्टर ए.पी. जेबलिया और उन की टीम ने इसे गंभीरता से लिया और जांच शुरू की.

पुलिस ने इलाके के पुराने लोगों से पूछताछ की. पता चला कि मकान में वर्षों पहले एक महिला रहती थी और बाद में मकान बेच दिया गया था. कुछ लोगों ने यह भी बताया कि कभीकभी एक व्यक्ति वहां आ कर बाहर दीया जलाता था. इन छोटीछोटी बातों ने पुलिस का शक और गहरा कर दिया. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और मजिस्ट्रैट की अनुमति के बाद मकान की खुदाई शुरू हुई.

सुबह से कई घंटे तक खुदाई चलती रही, लेकिन कुछ नहीं मिला. करीब 15 फुट गहराई तक पहुंचने पर एक पुराना सेप्टिक टैंक मिला. मिट्टी में कुछ कठोर टुकड़े भी मिले, जिन्हें फोरैंसिक टीम ने सुरक्षित कर लिया. शाम करीब सवा 6 बजे एक मजदूर को मिट्टी में हड्डी दिखाई दी. इस के बाद खुदाई तेज की गई और धीरेधीरे मानव शरीर की अनेक हड्डियां तथा खोपड़ी बरामद हो गई. रात तक करीब 20 फुट गहराई से मानव कंकाल के अधिकांश हिस्से निकाल लिए गए.

अब पुलिस के सामने सब से बड़ा सवाल था कि ये हड्डियां किस की थीं. जांच के दौरान बिलाल नाम के व्यक्ति का पता चला. उस ने पुलिस को बताया कि करीब 34 साल पहले उस ने अपनी आंखों के सामने एक युवती की हत्या होते देखी थी. उस के अनुसार, युवती का नाम फरजाना था और हत्या में शमसुद्दीन खेडावाला, उस का भाई इकबाल तथा अब्दुल करीम शामिल थे. बिलाल ने यह भी बताया कि शव उसी मकान के सेप्टिक टैंक में छिपाया गया था.

पूछताछ में शमसुद्दीन टूट गया और उस ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि मृत महिला उस की बीवी फरजाना थी. पुलिस को जांच में पता चला कि फरजाना की पहले सूरत में शादी हुई थी, लेकिन तलाक के बाद वह अहमदाबाद आ गई थी. वहां उस की मुलाकात शमसुद्दीन से हुई और दोनों ने निकाह कर लिया. बाद में शमसुद्दीन को शक हुआ कि फरजाना शादी के बाद भी देह व्यापार कर रही है. इसे ले कर दोनों के बीच लगातार विवाद होने लगा.

पुलिस के अनुसार, इसी विवाद के चलते शमसुद्दीन ने अपने भाई इकबाल और करीम के साथ मिल कर फरजाना की हत्या की योजना बनाई. एक दिन वह फरजाना को अपने एक रिश्तेदार के घर ले जाने के बहाने सालिया बीबी के मकान पर ले गया. रात में जब फरजाना सो गई तो तीनों ने कथित तौर पर उस की गला दबा कर हत्या कर दी. शव को सेप्टिक टैंक में डाल कर मिट्टी से ढक दिया गया. घटना के प्रत्यक्षदर्शी बिलाल को धमका कर चुप करा दिया गया था.

फरजाना के लापता होने की शिकायत इसलिए नहीं हुई, क्योंकि अहमदाबाद में उस का कोई करीबी नहीं था. शमसुद्दीन ने लोगों से कह दिया कि उस ने फरजाना को घर से निकाल दिया है. बाद में उस ने दूसरा निकाह कर लिया और सामान्य जीवन जीने लगा.

34 साल बाद बरामद हड्डियों की पहचान के लिए पुलिस ने फरजाना के भाई का डीएनए नमूना लिया. फोरैंसिक जांच में  हड्डियां फरजाना की सिद्ध हुईं. हत्या के 3 दशक गुजरने के बाद आरोपी समझ रहे थे की उन का अपराध अब कभी सामने नहीं आ पाएगा, लेकिन 34 साल बाद हत्या का रहस्य सबूतों की बरामदगी के साथ सामने आ गया. Woman Murder Mystery

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