सौजन्या- सत्यकथा

एक हफ्ते बाद रक्षाबंधन आने वाला था. फूलमाला के सोने के कुंडल उस के मायके में रह गए थे. इसलिए उस ने पति घनश्याम से कहा, ‘‘देखो जी, मेरे कुंडल मम्मी के पास रह गए हैं. आप मेरे मायके जा कर ले आइए ताकि मैं त्यौहार पर पहन सकूं.’’

पत्नी की मनुहार पर घनश्याम ने उसे भरोसा दिया कि वह रक्षाबंधन से पहले उस की मां से कुंडल ले आएगा.

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