पिता की मौत के बाद घर में नेहा और उस की मां सपना ही रह गई थीं. पिता ही कमाने वाले थे, उन के न होने पर घर की माली हालत काफी खराब थी. मांबेटी को समझ नहीं आ रहा था कि अपना जीवन आगे कैसे चलाएं.

सपना को खुद की चिंता कम और जवान बेटी की ज्यादा चिंता थी. वह सोच रही थी कि किसी तरह बेटी की शादी हो जाए तो वह इस बड़ी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगी. क्योंकि गरीब की जवान होती बेटी हर किसी की आंखों में चढ़ जाती है. नेहा के पिता मनोहरलाल लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में रहते थे. उन का छोटा सा कारोबार था. उन की मृत्यु के बाद कारोबार तो बंद हो ही गया, साथ ही घर में रखी जमापूंजी भी कुछ दिनों में खत्म हो गई.

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