अरुण जेटली, वेंकैया नायडू और नितिन गडकरी, इन तीनों मंत्रियों में कौन नरेंद्र मोदी का बड़ा चाटुकार है, यह तय कर पाना मुश्किल काम है. मोदी की खुशामद करने की इन तीनों की अलगअलग शैली और तौरतरीके हैं. नितिन गडकरी ने घोषित कर दिया है कि मोदीराज असल में लगभग रामराज है.

रामराज एक अवधारणा है जिस में प्रजा को कोई कष्ट नहीं है, चारों तरफ खुशहाली है, लोग पूजापाठ में लगे रहते हैं. कुटियों में रह रहे ऋषिमुनियों के लिए फलफूल और चढ़ावा ले जाते हैं और बदले में एक अदद आशीर्वाद ला कर फिर से राम की स्तुति में लग जाते हैं. यही गडकरी बता रहे हैं कि सब दुखदर्द भूल जाओ, मोदी का गुणगान करो तो दुख पास नहीं फटकेगा. इस दर्शनशास्त्र और मनोविज्ञान का सार कुछकुछ राहुल गांधी के उस बयान सरीखा है कि गरीबी एक मानसिक अवस्था है. ठीक इसी तरह, रामराज की फीलिंग का मशवरा गडकरी दे रहे हैं. यानी सुख होता नहीं है, बल्कि महसूस करना पड़ता है. वैसे, रामराज में क्या होता था, यह अगर वाल्मीकि रामायण में आंखें खोल कर पढ़ा जाए तो समझ आ जाएगा कि राम को इस महाकाव्य में जो करते दर्शाया गया है वही नरेंद्र मोदी कर रहे हैं और तर्क में विश्वास रखने वालों को यह आसानी से पचेगा नहीं.

 

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