जयललिता कइयों की अभिभावक थीं पर घोषित तौर पर खुद का वारिस नहीं छोड़ गई हैं. नतीजतन, कोई भी उन की छोड़ी खैरात और अकूत दौलत को नश्वर नहीं समझना चाहता. शुरुआती समझौते या फार्मूले के तहत जयललिता के चहेते पनीर सेल्वम मुख्यमंत्री बन गए और जयललिता की अभिन्न सहेली शशिकला नटराजन यानी चिन्नमा (मौसी) को पार्टी की बागडोर सौंप देने पर सहमति बन गई.

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