जिस जीएसटी यानि गुड्स एंड सर्विस टैक्स पर केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली एक कदम भी पीछे हटने को तैयार नहीं थे, उसमें वही सुधार अमल में ला रहे हैं जिन्हें कभी हवा में उड़ा देते थे. केंद्रीय वित्तमंत्री की यह अकड़पन 5 राज्यों में भाजपा की हार और 2019 के लोकसभा चुनाव के चलते कमजोर पड़ी है. अब वित्तमंत्री को मध्यम और कमजोर वर्ग के कारोबारियों की चिंता सता रही है. जीएसटी परिषद की 32वीं बैठक में छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिये 40 लाख तक के सालाना व्यापार वाले कारोबारियों को जीएसटी के बाहर कर दिया गया है. पहले यह सीमा 20 लाख थी. सरकार के इस फैसले से 50 फीसदी कारोबारी जीएसटी से बाहर हो जायेंगे.

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