यह सुनने में जरूर अजीब लगता है कि सेवा प्रदान करने की हमारी लचर व्यवस्था में यह दावा किया जाए कि आप को कहीं गए बिना बैंक से आवेदन भरने के एक घंटे के भीतर एक करोड़ रुपए तक का कर्ज मिल जाएगा. लेकिन, भारत सरकार देश में छोटे व लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इस तरह का प्रयोग कर रही है. वित्त मंत्रालय के सचिव का कहना है कि यह व्यवस्था अगले साल मार्च तक संभव हो जाएगी. इस के लिए सरकार ने एक पोर्टल शुरू किया है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस को लौंच करते हुए कहा था कि इस के जरिए नया कारोबार शुरू करने या अपना काम बढ़ाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के वास्ते यह पोर्टल शुरू किया गया है. बैंक गए बिना आवेदक के खाते में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के एक घंटे के भीतर ऋण मंजूर कर दिया जाएगा. लघु उद्यमिता के प्रति लोगों को उत्साहित करने के लिए और बैंकों में ऋण के वास्ते चक्कर लगाते रहने के बजाय अपने कारोबार पर कारोबारी को ज्यादा फोकस करने के मकसद से यह पोर्टल शुरू किया गया है.

सरकार का दावा है कि इस पोर्टल से 59 मिनट के बीच ऋण की राशि मंजूर कर दी जाएगी. योजना के तहत कुछ शर्तों के साथ बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है. सरकार की यह सचमुच क्रांतिकारी घोषणा है लेकिन असली चुनौती इसे हकीकत में बदलने की है.

इस तरह की योजनाएं और घोषणाएं सरकार अकसर करती है और देश का नागरिक ऐसी व्यवस्था की कल्पना कर रोमांचित होता है. लेकिन जब बात जमीनी हकीकत की आती है, आम आदमी की दशा जंगल में नाचते मोर की तरह होती है जो नृत्य के बाद अपने पांव की स्थिति देख कर रोने लगता है. उम्मीद की जानी चाहिए कि यह क्रांतिकारी सोच हकीकत में बदलेगी.

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