देश में इस समय नकली लग्जरी उत्पादों की बाढ़ आई हुई है. यह खुलासा उद्योग मंडल एसोचैम के हाल में हुए एक सर्वेक्षण में हुआ है. लोकप्रिय वस्तुओं के डुप्लीकेट बाजार में आसानी से मिल रहे हैं. सामान्य उपयोग की ब्रांडेड वस्तु का नकली सामान भी बाजार में उपलब्ध है. सामान्य बाजार से खरीद पर पता ही नहीं लगता कि उपभोक्ता असली माल ले कर जा रहा है या ठगा गया है. इस्तेमाल करने पर पता चलता है लेकिन अब तक बहुत देर हो गई होती है. रसीद ले कर सामान खरीदना हमारे अभ्यास में नहीं है.

बाजार के जानकार कहते हैं कि विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए यह स्वस्थ स्थिति नहीं है. बाजार में हमारे लिए विश्वसनीयता का संकट बढ़ता जा रहा है. यहां तक कि जीवनरक्षक दवाएं भी नकली मिल रही हैं. इन नकली दवाओं की सरकारी खरीद भी हो रही है, इसलिए सरकारी अस्पताल के डाक्टर मरीज को जल्द ठीक होने के लिए अस्पताल से नहीं, बाजार से दवा खरीदने की सलाह देते हैं.

उधर, नकली सामान की बिक्री पर लगाम लगाने की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है. बौलीवुड की फिल्में रिलीज हों, उस से पहले ही उन की नकली सीडी बाजार में आ जाती हैं. ये सब पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे होता है लेकिन कहीं कोई हलचल नहीं होती.

एसोचैम का कहना है कि नकली सामान का बाजार करीब 2,500 करोड़ रुपए का है.

सर्वेक्षण में कहा गया है कि नकली लग्जरी बाजार की जो रफ्तार है उस के मद्देनजर अगले 1-2 साल में यह बाजार दोगुना हो जाएगा. बाजार की इस स्थिति से बड़ी कंपनियां परेशान हैं. समय रहते इस से निबटने के कदम न उठाए गए तो खमियाजा सिर्फ बड़ी कंपनियों को ही नहीं, आम आदमी को भी झेलना पड़ेगा.

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