ईरान के 6 पश्चिमी देशों के साथ न्यूक्लियर डील साइन करने के फलस्वरूप भारतीय शेयर बाजार में रौनक रही. बाजार में मजबूती का माहौल है. नवंबर की शुरुआत से ही बाजार में तेजी का रुख रहा है और इस में लगातार बढ़त का माहौल रहा. 21 नवंबर को 3 सितंबर को बाजार में 652 अंक की गिरावट दर्ज की गई थी लेकिन 1 नवंबर को सूचकांक 21,294 अंक तक पहुंचा था जो अब तक का रिकौर्ड है.

उस के बाद बाजार में सूचकांक इस के आसपास रहा लेकिन 19 नवंबर के बाजार में विदेशी संकेतों तथा रुपए में गिरावट की वजह से गिर गया. लगातार 3 दिन की गिरावट के कारण बाजार 22 नवंबर के सप्ताहांत में 662 अंक तक लुढ़क गया.

नैशनल स्टौक ऐक्सचेंज यानी एनएसई में भी इसी तरह का रुख रहा और निफ्टी का सूचकांक भी 6 हजार अंक से नीचे उतर आया. बाजार की इस गिरावट की वजह अमेरिकी फेडरल से मिले नकारात्मक संकेत को बताया गया लेकिन इस से पहले बाजार में लगातार मजबूती का माहौल रहा.

25 नवंबर को ईरान डील के बाद बाजार 388 पौइंट चढ़ कर 26,605.15 अंक पर बंद हुआ. जबकि निफ्टी 120 पौइंट चढ़ कर 6,115 अंक पर बंद हुआ. यही नहीं, डौलर के मुकाबले रुपया 0.70 फीसदी चढ़ कर 62.50 पर रहा. बाजार के जानकारों का कहना है कि उतारचढ़ाव के बावजूद बाजार में मजबूती का रुख रहेगा. जानकार यह भी कहते हैं कि बाजार की स्थिति मजबूत है.

 

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