देश की राजधानी दिल्ली पर छाई गहरी धुंध वहां के सर्विस बेस्ड इकोनामी की सेहत के बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है. यहां कि इकोनामी को ध्यान में रखते हुए उद्योग संगठनों और विशेषज्ञों ने केंद्र और राज्य सरकारों को आगाह भी किया है कि दिल्ली में प्रदूषण का गंभीर स्तर अगर इसी तरह बना रहा तो जल्द ही यहां से बड़े पैमाने पर हाई स्किल्ड और टैलेंटेड वर्कफोर्स के साथ आंत्रप्रेन्योर्स का पलायन शुरू हो जाएगा.

पीएचडी चैंबर आफ कामर्स ऐंड इंडस्ट्रीज के चीफ इकनामिस्ट एसपी शर्मा ने कहा, स्मौग दिल्ली की सेहत को खराब कर रहा है और प्रदूषण का यह स्तर यहां कि सर्विसेज आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक है. प्लांट और मशीनरी वाली मैन्युफैक्चरिंग इकनोमी के मुकाबले सर्विस बेस्ड इकनोमी में बिजनस या जौब शिफ्ट करना आसान होता है. जब सांस लेना ही मुहाल हो जाएगा तो लोग कहीं और विकल्प तलाशेंगे.

वैसे उनकी यह बात भी सही है, जब दिल्ली जैसे शहर में प्रदूषण का यह स्तर है, पूरी हवा जहर में घूलती दिख रही है तो ऐसे में टौप एग्जिक्यूटिव यहां क्यों रहेंगे वह अपने टैलैंट के साथ उन शहरों में शिफ्ट होना चाहेंगे, जहां साफ हवा और सुरक्षित वातावरण हो, और जहां पर वह खुलकर सांस ले सकें.

उद्योग संगठनों ने केंद्र और राज्यों को भेजे सुझाव में कहा है कि सभी विभागों, शोध संस्थानों और संगठनों को मिलकर कोई रोडमैप निकालना चाहिए. संगठनों ने फिलहाल कुछ आपातकालीन कदम उठाने की सिफारिश भी की है. इसमें मिस्ट कैनन का इस्तेमाल, कंस्ट्रक्शन और कचरा जलाने की रोकथाम के लिए टास्क फोर्स, पल्यूटिंग यूनिटों पर सख्ती, गाड़ियों की संख्या नियंत्रित करने जैसे उपाय शामिल हैं.

सीआईआई दिल्ली स्टेट सेल के चेयरमैन राहुल चौधरी ने कहा, ‘हालात आदमी की सेहत से लेकर कारपोरेट तक के लिए गंभीर हैं. संबंधित सरकारों को किसानों और नागरिक संगठनों के साथ मिलकर कोई ठोस हल निकालना चाहिए. फसलों की कटाई के बाद बचे हिस्से की रिसाइकलिंग का विकल्प तलाशना चाहिए, जिससे उसे जलाना न पड़े.

दिल्ली पर छाई गहरी धुंध वहां के सर्विस बेस्ड इकोनामी की सेहत को देखते हुए कहा तो यह भी जा रहा है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो टूरिज्म, हास्पिटैलिटी और आउटडोर रिक्रिएशन इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है, और अगर प्रदूषण खत्म करने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए गए तो दिल्ली-एनसीआर में निवेश के लाले पड़ जाएंगे.

Tags:
COMMENT