अर्थशास्त्री रघुराम राजन के 3 वर्षों तक भारतीय रिजर्व बैंक  के गवर्नर के तौर पर अपनी सेवाएं देने के बाद मोदी सरकार ने अचानक दिसंबर 2016 में उन्हें पद से हटा दिया. उस के 2 माह बाद देश में नोटबंदी लागू की गई थी. राजन शिकागो के एक मशहूर बिजनैस स्कूल में प्रोफैसर बन गए. हाल ही में उन की विशेषज्ञता को देश के बैंकों में लगातार बढ़ रहे गैर निष्पादित संपत्ति यानी एनपीए का समाधान निकालने के उपाय सुझाने को आर्थिक मामलों की एक समिति के समक्ष बुलाया गया है.

समिति के अध्यक्ष तथा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी ने राजन को इस मामले में पत्र लिख कर उन्हें समिति के पैनल के समक्ष उपस्थित होने को कहा है. डा. जोशी ने पूर्व गवर्नर को यह पत्र सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम की सलाह पर लिखा है.

एनपीए के संकट से चिंतित समिति ने पिछले महीने अरविंद सुब्रमण्यम को अपने सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया था. उन्होंने समिति को सलाह दी कि रघुराम राजन इस मामले के विशेषज्ञ हैं और वे इस संबंध में बेहतर सलाह दे सकते हैं. बैंकिंग क्षेत्र के लिए एनपीए एक बड़ी समस्या बन गई है. सार्वजनिक बैंकों का कहना है कि उन का 7.77 लाख करोड़ रुपए डूब गया है. इस एनपीए को बचाने के लिए बैंक सरकार से गुहार लगा रहे हैं.

आखिर संसदीय समिति ने इस मामले को गंभीरता से लिया तथा वित्त सचिव सहित सभी प्रमुख अधिकारियों को तलब कर उन से बड़ा ऋ ण देने के बारे में हुई बैंकों के निदेशक मंडल की बैठक का पूरा विवरण देने को कहा है. रघुराम राजन के बारे में खबरें आई थीं कि उन्होंने नोटबंदी जैसे प्रस्तावों का विरोध किया था, जिस के कारण उन्हें पद से हटाया गया.

राजन यदि समिति को कोई उत्कृष्ट सुझाव देते हैं तो उस से बैंकों को बड़ा लाभ होगा और मोदी सरकार का उन्हें हटाने का निर्णय सवालों के दायरे में आएगा.

COMMENT