हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा कर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने वादा नहीं निभाया, उलटे उस की गलत नीतियों के चलते कितने ही कारोबारी बेकार हो गए. लेकिन, अब थोड़ी राहत की खबर यह है कि कंपनियां महिलाओं को रोजगार देने के लिए आगे आ रही हैं. वे किसी भी उम्र की हों, कंपनियां नौकरी देने में उन्हें प्राथमिकता दे रही हैं.

ई-कौमर्स, ई-व्यापार, ई-लेनदेन वगैरह के चलते डिलीवरी पर्सन्स की मांग खूब बढ़ी है. इस काम में लेडीज जेंट्स दोनों भागीदार हैं. इसे अब डिलीवरी इंडस्ट्री कहा जाने लगा है. पिछले एक साल के दौरान इन इंडस्ट्री में काम करने वाली महिलाओं की तादाद दोगुनी हो गई है. इस ट्रेंड के आगे और बढ़ने की उम्मीद भी है.

अमेरिकी मूल की अंतर्राष्ट्रीय ई-कौमर्स कंपनी अमेजन की बात करें तो वर्ष 2016 में उस के पास डिलीवरी और लोजिस्टिक सेगमेंट में सिर्फ 20 महिलाएं थीं.  अब उन की तादाद 800 पहुंच गई है. वहीं, फूड स्टार्टअप स्विगी मात्र  6 महीने में डिलीवरी के लिए 1,500 महिलाओं की भरती करने की तयारी कर रही है. अभी स्विगी कंपनी के पास इस काम के लिए 50 महिलाएं हैं. मुंबई की आल वीमेन डिलीवरी स्टार्टअप हेदीदी भी महिला कर्मचारियों की तादाद  300  से बढ़ा कर मार्च 2019 तक 1,500  करेगी.

कंपनियों द्वारा महिलाओं की भरती को प्राथमिकता देने के पीछे यह सोच है कि वे पुरुषों के अपेक्षा नौकरी कम बदलती हैं. आंकड़े बताते हैं कि जेंट्स के मुकाबले लेडीज में नौकरी छोड़ने की दर कम है. इस वजह से भी पुरुषों के दबदबे वाली डिलीवरी इंडस्ट्री में महिलाओं की भरती बढ़ रही है.

देश की बड़ी प्लेसमेंट एजेंसी रैंडस्टैड इंडिया के प्रवक्ता का कहना है कि लास्ट-माइल डिलीवरी के काम में नौकरी छोड़ने की दर 3 अंकों में है. इस से कंपनियों की भरोसेमंद सेवा देने की क्षमता घटती है.  फ्रंटलाइन की भूमिका में महिलाओं के नौकरी छोड़ने की दर काफी कम है.  ऐसे में डिलीवरी सेक्टर में महिलाओं की भूमिका बढ़ाना समझदारी भरा काम है.

मालूम हो कि अमेजन के पास देश में कोच्चि, पुणे, अहमदाबाद, नागपुर और मुंबई जैसे शहरों में 50 महिला डिलीवरी पार्टनर्स हैं.  अमेजन इंडिया के प्रवक्ता बताते हैं कि उन्हें अब तक ग्राहकों और डिलीवरी पार्टनर्स से काफी बेहतर रेस्पोंस मिला है.

एक दूसरी प्लेसमेंट एजेंसी टीमलीज सर्विसेज के प्रवक्ता का कहना है कि देश में फिलहाल 40,000 महिलायें डिलीवरी और लोजिस्टिक भूमिका में हैं. यह कुल डिलीवरी इंडस्ट्री का तकरीबन 6.77 फीसदी है. उम्मीद यह है कि डिलीवरी सेक्टर में महिलाओं की तादाद में आगे बढ़ोतरी ही होगी. यह भी अनुमान है कि वर्ष 2021 तक कुल डिलीवरी जॉब्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ कर 20-26 फीसदी तक हो जाएगी.

विदित हो कि अमेजन इंडिया ने तिरुअनंतपुरम में वीमेन ओनली डिलीवरी स्टेशन लांच करने की घोषणा की थी.  इस के बाद दूसरा सेंटर चेन्नई में खोला गया.  कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि कंपनी के वीमेन डिलीवरी स्टेशनों को महिलाएं ही संभालती और चलती हैं.  इन दोनों स्टेशनों पर महिलाएं टू व्हीलर्स पर सामान की डिलीवरी करती हैं.  आमतौर पर वे डिलीवरी स्टेशन से 2 से 3 किलोमीटर का दायरा कवर करती हैं.  फिलहाल अमेजन इंडिया के पास 3 ऐसे डिलीवरी स्टेशन चेन्नई, चंडीगढ़ और धुले (महाराष्ट्र) में हैं.  तिरुअनंतपुरम अब इस से बाहर हो गया है क्योंकि वहां अब पुरुष भी काम कर रहे हैं.

ई-कौमर्स फूड कंपनी स्विगी के प्रवक्ता का कहना है कि उन की कंपनी 6 महीने में कुल 90  हजार डिलीवरी पार्टनर्स में कम से कम 2 फीसदी महिलाओं को शामिल करना चाहती है.  कंपनी चाहती है कि जेंडर के आधार पर कोई भेदभाव न हो और सभी को काम करने का मौका मिले.

हेदीदी कंपनी का कहना है कि वह फ्रंट-एंड पर लोजिस्टिक और बैक-एंड पर स्किल कंपनी है. कंपनी ने अक्टूबर में 2 महिला सहायकों के साथ फोर-व्हीलर डिलीवरी लांच की थी, एक महिला ड्राइविंग सीट संभालती है और एक महिला डिलीवरी करती है.

इस प्रकार कंपनियों का कहना है कि डिलीवरी इंडस्ट्री में महिलाओं की सैलरी पुरुषों के बराबर ही है. यह अतितिक्त भुगतान के साथ 15 हज़ार से 30 हज़ार रुपए प्रति महिना होती है. कुल मिला कर ई-कौमर्स कारोबार के चलन से महिलाओं के अच्छे दिन आ गए हैं, उन्हें खूब रोजगार मिल रहे हैं.

Tags:
COMMENT