Doosra Movie Review: निर्देशक अभिनव देव की फिल्म ‘दूसरा’ अनोखे एक्सपैरिमैंट के साथ परदे पर आई है. फिल्म 2 अलगअलग कहानियों को पैरलल रूप से चलाती है. पहली कहानी राजस्थान के एक छोटे से शहर में रहने वाली तारा (प्लाबीता बोरठाकुर) की है, जो रूढ़िवादी परिवार की पाबंदियों और पितृसत्तात्मक सोच के बीच जूझ रही है. दूसरी कहानी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे सौरव गांगुली की है, जो अपनी लीडरशिप और एग्रैसिव नैचर से भारतीय क्रिकेट टीम को एक नई पहचान दिला रहे थे.
फिल्म का उद्देश्य यह दिखाना है कि कैसे एक लड़की को अपने रूट्स, अपनी आइडैंटिटी और अपना जैंडर दुनिया के सामने लाने के लिए अपने ही घर के भीतर एक लंबी और कठिन जंग लड़नी पड़ती है.
अभिनव देव ने इस कहानी को कहने के लिए एक हाइब्रिड फौर्मेट का सहारा लिया है. फिल्म बीचबीच में डौक्यूड्रामा में बदल जाती है. इस में एक तरफ फिक्शनल ड्रामा चलता है, तो दूसरी तरफ 2002 की नेटवेस्ट सीरीज, लौर्ड्स की बालकनी में गांगुली का टीशर्ट लहराना, मैचफिक्सिंग का काला साया और सचिन तेंदुलकर के कप्तानी छोड़ने जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को असली फुटेज और इंटरव्यूज के जरिए दिखाया गया है. हर्षा भोगले, शशि थरूर और जौन राइट जैसे जानेमाने चेहरों के इंटरव्यू इस डौक्यूड्रामा वाले हिस्से में देखने को मिलते हैं.
फिल्म की कहानी ले कर जाती है राजस्थान के ऐसे ग्रामीण इलाके के परिवार में जहां, तारा की भाषा में कहें तो, औरतों के घर नहीं होते, मालिक होते हैं. मगर तारा थोड़ी अलग होती है. उस के स्वभाव में सवाल करना, अड़ जाना और बनेबनाए रिवाजों को चैलेंज करना बचपन से शामिल होने लगता है. उसे नहीं पसंद होता कि एक ही घर में उस से ज्यादा उस के भाई को सहूलियतें मिलती हैं. लड़कालड़की के काम अलगअलग बंधे होते हैं, और शादी के लिए उस की पढ़ाई छुड़वा दी गई है.
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