संजय लीला भंसाली की फिल्म “पद्मावती” के प्रदर्शन को लेकर पूरे देश में विरोध जारी है. इस फिल्म को सिनेमाघरों में न दिखाने को लेकर हो रहे विरोध के बीच अब नेताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है. हाल ही में राजस्थान में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने के बाद अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकासनगर इलाके में क्षत्रिय समाज के लोगों ने ‘पद्मावती’ फिल्म का पुरजोर विरोध किया है. यही नहीं उन्होंने अपना विरोध दर्शाते हुए फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का पुतला तक फूंक दिया.

इस विरोध प्रदर्शन में शामिल क्षत्रिय समाज के नेता मनोज सिंह चौहान ने कहा, “पैसा कमाने की होड़ में हमारी संस्कृति, हमारी आस्था हमारे इतिहास और हमारे सम्मान से खिलवाड़ करने की फिल्म वालों की करतूत को हम क्षत्रिय कतई सफल नहीं होने देंगे. फिल्म ‘पद्मावती’ किसी भी हालत में सिनेमाघरों में चलने नहीं दी जाएगी. इस फिल्म का सभी क्षत्रिय संगठन खुलकर विरोध करेंगे. उन्होंने सभी फिल्म निर्माता व निर्देशकों को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में क्षत्रिय समाज के किसी भी ऐतिहासिक महापुरुष के बारे में गलत फिल्मांकन किया तो उसे विरोध का सामना करना पड़ेगा.

चौहान ने आगे कहा, आज अगर हम क्षत्रिय एक नहीं हुए तो वह दिन दूर नहीं जब फिर से कोई फिल्म निर्माता इसी गलती को दोहराएगा. मेरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निवेदन है कि वह तत्काल इस फिल्म पर रोक लगाएं. ताकि देश में किसी तरह की हिंसा न हो.

वहीं दूसरी तरफ फिल्म के प्रदर्शन के विरोध में बीजेपी के लक्सर विधायक संजय गुप्ता ने खुलेआम चेतावनी दी है कि पद्मावती फिल्म का प्रदर्शन करने पर वे अपने समर्थकों के साथ संबंधित सिनेमा हाल को फूंक देंगे. संजय गुप्ता का कहना है कि फिल्म निर्देशक और निर्माता ने भारतीय संस्कृति के साथ खिलवाड़ किया है. ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर फिल्म को रोचक बनाने की कोशिश की गई है, जो सरासर गलत है. ऐसे में फिल्म निर्देशक को भी सजा मिलनी चाहिए. फिल्म में ऐसे दृश्यों को दर्शाया गया है जिनका इतिहास में कोई उल्लेख नहीं है.

संजय गुप्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि फिल्म को हरिद्वार के किसी भी सिनेमाघर में दिखाया गया तो वे अपने समर्थकों के साथ न सिर्फ तोड़फोड़ करेंगे बल्कि हाल को भी आग के हवाले कर देंगे. विधायक गुप्ता का यह भी कहना है कि उनका विरोध सिनेमाघर संचालकों से नहीं है वरन फिल्म को लेकर है.

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