राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गणेश आचार्या की लेटेस्ट तस्वीरें सभी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच रही हैं. उनके अगर हालिया अपियरेंस को देखा जाए तो आप पाएंगे कि वो अपने वजन के आधे हो गए हैं. इसकी वजह है उनका 85 किलो वजन घटाना. अपने वजन घटाने के बारे में हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए उन्होंने कहा- यह मेरे लिए कठिन था. मैं पिछले डेढ़ साल से अपने शरीर पर काम कर रहा था. 2015 में आई अपनी फिल्म ‘हे ब्रो’ के लिए मैंने 30-40 किलो वजन बढ़ाया था और इसके बाद मेरा वजन 200 किलो पर पहुंच गया. अब वही वेट उतार रहा हूं.

2013 में आई फिल्म भाग मिल्खा भाग के गाने ‘मस्तो का झुंड’ को कोरियोग्राफ करने के लिए गणेश आचार्य को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्होंने कहा कि वजन घटाने की प्रेरणा मुझे इस बात से मिली कि इसके जरिए मैं लोगों के सामने अपना एक अलग वर्जन दिखाउंगा. एक सोच थी कि मुझे बस इसे करना है. लोगों ने गणेश आचार्य को मोटा ही देखा है. इसी वजह से मैं इस इमेज को बदलना चाहता था. मैंने अभी तक लगभग 85 किलो वजन  कम कर लिया है. वजन घटाने से कोरियोग्राफर काफी खुश हैं. उन्होंने कहा कि मुझे फर्क पता चलना शुरू हो गया है.

जब मेरा वजन इतना ज्यादा था तब भी मैं डांस करता था. लेकिन तब और अब में फर्क इतना है कि मेरी डांस करने की ऊर्जा अब डबल हो गई है. मराठी फिल्म के जरिए डायरेक्टर बनने वाले गणेश अपने वजन घटाने के बारे में एक वीडियो रिलीज करने का प्लान बना रहे हैं. उन्होंने कहा- मैं जल्द ही यूट्यूब पर एक वीडियो लॉन्च करने वाला हूं जिसमें मेरी ट्रांसफॉर्म्ड बॉडी की यात्रा दिखाई देगी. बता दें कि कुछ समय पहले बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो ट्वीट किया था जिसमें वह और डांस कोरियोग्राफर गणेश आचार्य साथ में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के सुपरहिट सीन को रीमेक करते नजर आ रहे थे.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...