इन दिनों सरकार ने ‘बेटी पढ़ाओ’ और ‘बेटी बचाओ’ जैसी मुहिम चला रखी है. सरकार की तरफ से भ्रूण हत्या रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. मगर लेखक, निर्माता व अभिनेता त्रिलोक नौलखा का मानना है कि भ्रूण हत्या रोकने के लिए सरकार की तरफ से समुचित उपाय नहीं किए गए हैं. वह कहते हैं-‘‘हमारी राय में भ्रूण हत्या के खिलाफ सरकार को जिस तरह से कदम उठाने चाहिए, उस तरह से कदम उठाने में पूरी तरह से नाकामयाब रही है. इसीलिए हमने राजस्थान की पृष्ठभूमि पर एक रोचक कथा के साथ फिल्म ‘मेरा क्या कसूर’ का निर्माण किया है. इसमें मैने नकारात्मक किरदार निभाया है, जो कि फिल्म में अंततः स्वीकार करता है कि उसने अपनी जिंदगी में हमेशा गलत ही किया है. हमने औरत के गर्भ में ही लड़कियों भ्रूण की हत्या कर दिए जाने की वजहों को भी रेखांकित किया है. इतना ही नही हमने अपनी फिल्म में भ्रूण हत्या को राकने का कारगर व प्रभावशाली उपाय भी बताया है.’’

जब हमने कहा कि आमिर खान अपने टीवी शो ‘‘सत्यमेव जयते’’ में भी भ्रूण हत्या का मसला उठा चुके हैं, पर इससे कोई असर नहीं हुआ. इस पर फिल्म के निर्देशक निरंजन भूधदरा ने कहा-‘‘आमिर खान के टीवी शो ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया था. उनके शो को देखने के बाद हमने नए सिरे से भ्रूण हत्या के मसले पर गहन शोध कार्य किया. हमने पाया कि भ्रूण हत्या सबसे ज्यादा राजस्थान में ही होती हैं. हमने अपनी फिल्म की कहानी भी राजस्थान में ही रखी. हमने अपनी इस फिल्म में साफ तौर पर कहा है कि यदि लड़कियों को औरत के गर्भ में ही इसी तरह मारा जाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब हर पुरूष कुंवारा रह जाएगा. क्योंकि पुरूष से विवाह के लिए इस संसार में औरत ही नहीं होगी. हमने अपनी फिल्म में इस बात पर जोर दिया है कि संसार में कई तरह के कर्म करने का हक सिर्फ लड़को को दिया गया है, लड़कियों को नहीं. इसे बदलने की जरुरत है. एक पिता या माता का दाह संस्कार या अंतिम संस्कार बेटा ही नहीं बल्कि बेटी भी कर सकती है.’’

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