दक्षिण भारतीय फिल्में वैसे तो अपने चालू मसाला और बेसिरपैर के मनोरंजन के लिए मशहूर हैं लेकिन बदलते वक्त के साथ तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम भाषा में बनने वाली फिल्में अपने कथ्य और तकनीक के चलते हिंदी फिल्मों को भी जोरदार टक्कर देने लगी हैं. यही वजह है कि नैशनल अवार्ड के दौरान भी यहां की फिल्मों का जलवा रहता है. बहरहाल, इन दिनों एसएस राजमौली की तेलुगू फंतासी फिल्म बाहुबली अपने बड़े कैनवास, जबरदस्त स्पैशल इफैक्ट और भव्यता के चलते न सिर्फ चर्चा बटोर रही है बल्कि जम कर कमाई भी कर रही है. बाहुबली की सफलता इस बात की ओर इशारा करती है कि अगर नकल के भरोसे रहने के बजाय अच्छी कहानी पर मेहनत और तकनीक का तड़का लगाया जाए तो भारतीय दर्शकों को हर बार हौलीवुड का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा.

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