लोकसभा चुनाव से लगभग 3 महीने पहले 11 जनवरी को ‘द ऐक्सिडैंटल प्राइम मिनिस्टर.’ फिल्म रिलीज हुई. इस से पहले इस फिल्म का ट्रेलर पिछले वर्ष 27 दिसंबर को जारी हुआ. जिस के बाद से भाजपा और कांग्रेस आमनेसामने थीं. दोनों के बीच कई दिनों तक तकरीबन हर टीवी चैनल, अखबार और सोशल मीडिया पर ऐसी जबानी जंग छिड़ी रही जिस से हर घर को पता चल गया कि मनमोहन सिंह के बारे में बनी ‘द ऐक्सिडैंटल प्राइम मिनिस्टर’ फिल्म जल्दी ही थिएटरों की शोभा बढ़ाने वाली है.

कांग्रेस ने इसे भ्रामक प्रचार, मनमोहन सिंह को बदनाम करने की साजिश बताया तो भाजपा की ओर से कहा गया कि यह कहानी है कि कैसे एक परिवार ने देश को 10 साल तक बंधक बना कर रखा. तब कई फिल्म समीक्षकों ने कहा कि इस चुनाव में नया ट्रैंड शुरू होगा. आम चुनाव तक कई बायोपिक रिलीज होने वाले हैं जो इस बात का संकेत है कि वोट के लिए फीचर फिल्में इस्तेमाल की जाएंगी.

वे समीक्षक गलत नहीं थे. पिछले चुनाव में सोशल मीडिया का इस्तेमाल हुआ था, इस बार फीचर फिल्मों का होगा. चुनावों को ध्यान में रख कर इस महीने 4 बायोपिक रिलीज हुए हैं. उन के पीछे एक राजनीतिक मकसद है कि आखिर फिल्में दर्शकों की सोच को प्रभावित करती हैं.

हर शुक्रवार फार्मूला फिल्में परोसने वाले बौलीवुड को पिछले कुछ समय से अचानक बायोपिक का चस्का लग गया है. कुछ राजनीतिक दल चुनाव के मौसम में चुनावप्रचार के लिए इस का जम कर इस्तेमाल कर रहे हैं. इस साल के पहले महीने में ही अब तक 4 बायोपिक प्रदर्शित हो चुके हैं, चुनाव तक कई और आने वाले हैं.

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