Ramayana Movie: 5 नवंबर को नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ रिलीज हो चुकी है. यह अब तक की सब से महंगी बौलीवुड फिल्म है. इस में रणबीर कपूर राम बने हैं. प्रमोशन के चक्कर में रणबीर ने ऐसा बयान दे दिया जिस ने इतिहास को भी झूठा कर दिया और आस्था का भी मजाक बना दिया. उन्होंने कहा कि भारत में 5 हजार साल पहले ही उड़ने वाली कार थी. अब सवाल यह है कि क्या फिल्म बेचने के लिए मिथ्या को ही इतिहास बता दिया जाएगा?
जिन्हें इतिहास और धर्म की कहानियों में फर्क पता न हो, वे लोग कुछ ऐसी बातें करते हैं जिन का कोई सिरपैर नहीं होता. रणबीर कपूर ने अपनी फिल्म ‘रामायण’ की पब्लिसिटी के दौरान कहा, “एलन मस्क ने तो आज उड़ने वाली कार बनाई है, हमारे यहां तो 5 हजार साल पहले ही उड़ने वाली कार थी.” रणबीर कपूर की यह बात न तो इतिहास से मेल खाती है और न ही ऐसा धर्म की पोथियों से साबित होता है. सवाल यह है कि क्या रणबीर कपूर ‘रामायण’ के प्रमोशन के लिए इतिहास और आस्था में फर्क करना भूल गए हैं?
प्रमोशन के लिए एक इंटरव्यू में होस्ट ने कहा कि उस समय के हथियार कितने अद्भुत थे? इस सवाल पर रणबीर ने कहा, “एलन मस्क ने हाल ही में एक उड़ने वाली कार बनाई है, भारत ने तो ऐसा 5,000 साल पहले ही कर लिया था, पुष्पक विमान के जरिए.”
इस बयान को सुन कर हंसी आती है क्योंकि एक तरफ एलन मस्क की टेस्ला रोडस्टर है, जिसे 15 अक्टूबर को टेक्सास में दिखाया गया, जिस में रौकेटस्टाइल के थ्रस्टर्स लगे हैं, जिस के पीछे फिजिक्स, इंजीनियरिंग, मेटलर्जी, एयरोडायनौमिक्स, बैटरी, थ्रस्ट, सैकड़ों इंजीनियरों की मेहनत और अरबों डौलर की रिसर्च लगी है. दूसरी तरफ पुष्पक विमान है, जो एक कहानी में लिखा हुआ एक दिव्य, मन की गति से उड़ने वाला, जितने चाहे उतने लोगों को समा लेने वाला महल है, जिसे विश्वकर्मा ने ब्रह्मा के लिए बनाया था, ब्रह्मा ने कुबेर को दिया था, कुबेर से रावण ने छीन लिया था. एक तरफ असली मशीन है, दूसरी तरफ कल्पना की उड़ान है. लेकिन 4 हजार करोड़ रुपए की फिल्म बेचने के लिए कल्पना को इतिहास बता दिया गया और इतिहास को विज्ञान बता दिया गया.
रामायण इतिहास नहीं
रामायण एक काव्यग्रंथ है, जिसे करीब 2 हजार साल पहले लिखा गया है, इसलिए रामायण की कहानी को इतिहास नहीं माना जाता. महाभारत, इलियड, हातिमताई, ओडिसी, अरबियन नाइट्स और अलिफ लैला की तरह अलगअलग समय और इलाके में रचे गए इन काव्यग्रंथों में कवि ने अपनी कल्पना से देवता, राक्षस, उड़ने वाले रथ, मन की गति से चलने वाले अस्त्रशस्त्र सब लिख मारा है क्योंकि काव्य का काम सच बताना नहीं होता, काव्य का काम भाव जगाना होता है. पुष्पक विमान भी रामायण नाम की काव्यरचना की कहानी का हिस्सा है. जैसे, कुरान, अलिफ लैला, अरबियन नाइट्स में उड़ने वाले घोड़े और उड़ने वाली कालीन का जिक्र है वैसे ही रामायण में पुष्पक विमान और हनुमान के उड़ने का जिक्र है.
अब कोई अरबी आदमी कहे कि देखो, हमारे यहां तो पहले से लोग हवा में उड़ते थे तो इस से वह इतिहास नहीं बन जाता. कोई ग्रीक आदमी कहे कि देखो, हमारे यहां तो पहले से पेगासस नाम का उड़ने वाला घोड़ा था तो इस से वह जूलौजी नहीं बन जाती. कोई अंगरेज बच्चा कहे कि हैरी पौटर की झाड़ू उड़ती थी तो इस से वह एयरोस्पेस इंजीनियरिंग नहीं बन जाती लेकिन भारत में यही हो रहा है. कहानी को ही सुबूत बना दिया जा रहा है, कल्पना को ही टैक्नोलौजी बता दिया जा रहा है. रणबीर कपूर ने यही किया है, उन्होंने एक फिल्म के वीएफएक्स को बेचने के लिए पूरे देश के इतिहास को ही झूठा बना दिया.
क्या पुष्पक विमान गंगा में समा गया?
यह सिर्फ एक ऐक्टर की बेवकूफी नहीं है बल्कि यह एक पूरी मानसिकता की बीमारी है. अगर 5,000 साल पहले हमारे पास उड़ने वाली कार थी तो उस का कोई आर्कियोलौजिकल एविडैंस क्यों नहीं मिला? हड़प्पा से ले कर 6 करोड़ साल पुराने डाइनासोर तक के सुबूत मिलते हैं लेकिन पुष्पक विमान का एक पुर्जा तक नहीं मिला. अगर पुष्पक विमान सच में था तो वह कहां गया? क्या वह भी विलुप्त हो गया? क्या उसे भी किसी ने चुरा लिया? या वह भी गंगा में बह गया? सच यह है कि हमारे पास इस का कोई पुरातात्विक सुबूत नहीं है, कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, सिर्फ एक किताब में लिखा हुआ वर्णन है. और किताब में लिखा हुआ वर्णन सुबूत नहीं होता.
किताब में तो यह भी लिखा है कि हनुमान जी पहाड़ उठा कर उड़ गए थे, तो क्या हम यह भी मान लें कि 5,000 साल पहले हमारे पास पहाड़ उठाने वाली क्रेन थी? किताब में तो यह भी लिखा है कि रावण के 10 सिर थे तो क्या हम यह भी मान लें कि 5,000 साल पहले हमारे पास जेनेटिक इंजीनियरिंग थी? कहानी को कहानी की तरह पढ़ना चाहिए, उस से सीख लेनी चाहिए, आनंद लेना चाहिए लेकिन उसे फिजिक्स की किताब बनाना समझदारी नहीं है. वरना, हम दुनिया की हंसी का पात्र बन जाएंगे और बन भी रहे हैं, क्योंकि रणबीर का बयान सुन कर ही सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं, ‘भाई, अमेरिका में यह सब मत कहना, हम तो पुष्पक विमान का पेटेंट कराना ही भूल गए.’
सब से बड़ा नुकसान यह है कि इस झूठे गर्व के चक्कर में हम असली गर्व को भूल जाते हैं. भारत का असली गर्व यह है कि हम ने नालंदा, तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय बनाए, हम ने आज इसरो से चांद पर यान भेजा, हम ने मंगलयान भेजा, हम ने वैक्सीन बनाई. यह असली इतिहास है, जिसे सुबूत के साथ दुनिया मानती है. लेकिन रणबीर जैसे लोग उस असली इतिहास को छोड़ कर नकली इतिहास बेच रहे हैं क्योंकि नकली इतिहास बेचना आसान है, उस के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ती, उस के लिए लैब नहीं बनानी पड़ती. बस, एक डायलौग मार दो, तालियां मिल जाएंगी, फिल्म चल जाएगी.
‘रामायण’ फिल्म का प्रमोशन जरूर होना चाहिए, वीएफएक्स की तारीफ होनी चाहिए और ऐक्टिंग की तारीफ भी होनी चाहिए लेकिन प्रमोशन के लिए कहानी को विज्ञान बताना ठीक नहीं है. काव्य को इतिहास मत बनाइये, पुष्पक विमान को टेस्ला मत बताइए क्योंकि जब तक हम कल्पना और हकीकत में फर्क नहीं समझेंगे, तब तक हम न विज्ञान में आगे बढ़ेंगे, न इतिहास में. हम बस 5,000 साल पहले की उड़ने वाली कार की कहानी सुन कर ताली बजाते रहेंगे और दुनिया हम से आगे निकल कर सच में उड़ने वाली कार बना लेगी.
रणबीर ने रामायण को खुद ही झूठा साबित कर दिया
रणबीर कपूर का यह 5,000 साल वाला दावा सिर्फ इतिहास से ही नहीं, बल्कि उन की अपनी ही धर्मकथा से भी टकराता है क्योंकि वाल्मीकि के अनुसार रामायण तो त्रेता युग में हुई थी. हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार 4 युग होते हैं. सतयुग 17,28,000 साल का, त्रेता युग 12,96,000 साल का, द्वापर युग 8,64,000 साल का और कलियुग 4,32,000 साल का. इसी हिसाब से कलियुग शुरू हुआ था 3102 ईसा पूर्व में, यानी, आज से करीब 5,128 साल पहले जब महाभारत का युद्ध खत्म हुआ. यानी, 5,000 साल पहले तो कलियुग चल रहा था.
अब बताइए, अगर 5,000 साल पहले त्रेता युग था तो द्वापर कब था? क्या राम के बाद सीधे कलियुग आ गया, कृष्ण बीच में कहीं गायब हो गए? क्या महाभारत हुआ ही नहीं? क्या द्वापर युग को किसी ने स्किप कर दिया? अगर रामायण 5,000 साल पहले हुई तो महाभारत कब हुई, क्या 4,999 साल पहले? एक साल में पूरा द्वापर युग निपट गया?
यही तो दिक्कत है, रणबीर कपूर जैसे लोगों को न तो अपने धर्म का गणित पता है, न इतिहास का. इन्हें बस एक नंबर याद है, 5,000 साल. बस, हर चीज में 5,000 साल ठूंस दो. 5,000 साल पहले विमान था, 5,000 साल पहले इंटरनैट था, 5,000 साल पहले सर्जरी थी. अरे भाई, अगर त्रेता युग 12 लाख साल का था तो रामायण 5,000 साल पहले कैसे हो गई? वह तो लाखों साल पहले होनी चाहिए. और अगर रामायण लाखों साल पहले हुई तो 5,000 साल वाला दावा झूठा हो गया. मतलब, अपने धर्म के अंदर ही 2 दावे आपस में लड़ रहे हैं. एक तरफ शास्त्र कहते हैं त्रेता लाखों साल पहले था, दूसरी तरफ फिल्म का हीरो कहता है 5,000 साल पहले था. दोनों में से एक तो झूठा है. इस का सीधा सा मतलब यही है कि दोनों ही कल्पना हैं. कम से कम अपनी कल्पना में तो कंसिस्टेंसी रखनी चाहिए.
हड़प्पा को हड़पने की साजिश
दूसरी बात, 5,000 साल पहले तो भारत में हड़प्पा सभ्यता, सिंधु घाटी सभ्यता थी. जिस के आर्कियोलौजिकल सुबूत पूरे भारत में बिखरे पड़े हैं. मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी- इन जगहों की खुदाई में सीलें मिली हैं, तराजू के बांट मिले हैं, नालियां मिली हैं, स्नानागार मिला है, अन्न के गोदाम मिले हैं, खिलौने मिले हैं, मिट्टी के बरतन मिले हैं और तांबे के औजार मिले हैं. किसी भी खुदाई में एक भी विमान का पुर्जा नहीं मिला, एक भी इंजन नहीं मिला, एक भी पंखा नहीं मिला, एक भी पैट्रोलपंप नहीं मिला, एक भी रनवे नहीं मिला, एक भी पायलट की हड्डी नहीं मिली.
अगर 5,000 साल पहले भारत में पुष्पक विमान उड़ रहा था तो हड़प्पा के लोग बैलगाड़ी पर क्यों चल रहे थे? क्यों वो लोग नाव से व्यापार करने मेसोपोटामिया जा रहे थे? क्यों उन के घरों में नाली थी. उन के शहर में तो कोई हैलिपैड नहीं था? क्यों उन के मोहरों पर बैल, हाथी, गैंडा बना है लेकिन विमान नहीं बना है? सच यह है कि हड़प्पा के लोगों को लोहे का भी पता नहीं था, वे तांबा-कांसा युग में थे. जिस सभ्यता को लोहे का पता नहीं था वह उड़ने वाली कार कैसे बना लेगी?
कहानी को कहानी रहने दिया जाए तो इस से कोई दिक्कत नहीं है. रामायण एक काव्य है, उसे काव्य की तरह पढ़ना चाहिए. रामायण से नैतिकता, समर्पण और त्याग सीखना है, तो सीखिए. उसे इतिहास की किताब मत बनाइए. जब काव्य को इतिहास बताया जाएगा तो त्रेता-द्वापर-कलियुग का गणित भी बिगड़ जाएगा. इस से धर्म की सारी पोथियां ही बिखर जाएंगी. सच बात तो यह है कि 5 हजार साल पहले पुष्पक विमान ढूंढ़ने के चक्कर में हड़प्पा की खुदाई को भी झुठलाना पड़ेगा और पूरी दुनिया के सामने खुद को ही मजाक बनना पड़ेगा. रणबीर कपूर ने यही किया है. उन्होंने 5,000 साल कह कर न सिर्फ इतिहास का मजाक उड़ाया है बल्कि अपनी ही रामायण का भी मजाक उड़ाया है. Ramayana Movie




