Bade Ghulam Ali Khan: यह कहानी है पटियाला घराने के बेताज बादशाह उस्ताद व शास्त्रीय गायक बड़े गुलाम अली खां साहब की. खां साहब फिल्मों में गाने के सख्त खिलाफ थे. लेकिन संगीतकार नौशाद और फिल्म निर्देशक के. आसिफ उन्हें अपनी फिल्म ‘मुगल ए आजम’ में गवाना चाहते थे. खां साहब के पास के आसिफ ने अपना दूत भेजा, जिसे खां साहब ने बैरंग यह कह कर वापस कर दिया कि वह फिल्मों में नही गाते.
तब संगीतकार नौशाद खुद उन्हे अपनी फिल्म में तानसेन की आवाज बनने के लिए मनाने पहुंचे, तो खां साहब ने मना करने के मकसद से उस दौर के हिसाब से असंभव सी रकम यानी कि पच्चीस हजार रूपए प्रति गाने की मांग कर दी. वह सोच रहे थे कि इतनी बड़ी रकम सुनकर संगीतकार नौशाद व निर्दशक के आसिफ भाग खड़े होंगे. लेकिन धुन के पक्के के. आसिफ व नौशाद ने बिना पलक झपकाए तुरंत दस हजार रूपए बतौर पेशगी उनके सामने रख दिए. इस तरह इतिहास का सबसे महंगा गाना रिकॉर्ड ‘प्रेम जोगन बन के’ बड़े गुलाम अली खां की आवाज में रिकार्ड हुआ था.
हम याद दिला दें कि बड़े गुलाम अली खां साहब का जन्म अविभाजित भारत के कसूर (अब पाकिस्तान में) में हुआ था. विभाजन के बाद वह पाकिस्तान चले गए थे. लेकिन पाकिस्तान में उनका मन नहीं लगा. तब वह अपनी कला और संगीत की कद्र करने वाले देश, भारत वापस आना चाहते थ.1957 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें भारत की नागरिकता देते हुए वापस भारत बुला लिया. और हैदरााबद के तत्कालीन नवाब ने उन्हें बशीरबाग पैलेस उपहार में दे दिया था.
लंबी बीमारी और लकवे के कारण जीवन के अंतिम वर्षों में वे चल-फिर नहीं पाते थे. अंततः 23 अप्रैल 1968 को महज़ 65 वर्ष की आयु में हैदराबाद के बशीरबाग पैलेस में ही उन्होंने अंतिम सांस ली.
भारतीय शास्त्रीय संगीत और सिनेमा के इतिहास में उनका नाम औरफिल्म ‘मुगल ए आजम’ का यह बेमिसाल किस्सा हमेशा अमर रहेगा…
क्या आपने ‘मुगल-ए-आजम’ में उनका गाया यह अमर गीत सुना है? Bade Ghulam Ali Khan




