Human Height Evolution: पुराने जमाने के लोग लम्बे हुआ करते थे, यह आम धारणा धर्म से निकली है. जो बिलकुल झूठी साबित हुई है. रिसर्च बताते हैं कि आज दुनिया भर के युवाओं का औसत कद 100 साल पहले के उनके पुरखों से लगभग 10 सेंटीमीटर ज्यादा है. 1920 में यूरोप के लड़के का औसत कद 167 सेंटीमीटर था, आज वही 177-178 सेंटीमीटर तक है. साउथ कोरिया की लड़कियां तो पिछले 100 साल में 15-20 सेंटीमीटर बढ़ गई हैं. इससे धर्म का यह झूठ भी ख़ारिज हो गया कि इंसान की बनावट ऊपर बैठा कोई भगवान तय करता है.

हिंदू पुराण कहते हैं सतयुग में आदमी 32 हाथ लंबा था, त्रेता में 14 हाथ, द्वापर में 7 हाथ और अब कलियुग में बौना रह गया. इस्लामिक हदीस में कहा गया कि आदम 60 हाथ यानी 90 फीट के थे. बाइबल में नेफिलिम थे, 10-12 फीट के दानव. यानि पुराने समय के लोग बहुत लम्बे हुआ करते थे फिर इंसान घटते-घटते आज जितना हो गया लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च से धर्म की यह कहानियां सिर्फ गप्प ही साबित होती हैं.

अब सवाल है कि यह गप्प क्यों बनाई गई? अतीत को महान बताना धर्म का बिजनेस मॉडल है. अगर आप मान लें कि पहले के लोग ज्यादा बड़े, ज्यादा नेक, ज्यादा ताकतवर थे तो आप आज के इंसान को छोटा और पापी महसूस करेंगे. और पापी इंसान को ही धर्म की जरूरत पड़ती है. Our World in Data ने इस झूठ को एक्सपोज़ कर दिया है. जीवाश्म, कंकाल, सेना के रिकॉर्ड सब बताते हैं कि 10 हजार साल पहले इंसान आज से छोटा था, बड़ा नहीं. कुपोषण, बीमारी और बाल मजदूरी ने उसे बौना बना रखा था.

इतिहासकारों के पास जब राजाओं के खजाने का हिसाब नहीं होता तो वे इंसान की हड्डी नापते हैं. क्योंकि हड्डियां झूठ नहीं बोलती. क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के इतिहासकार डॉ. मथियास ब्लम यही कहते हैं कि “लंबाई खुशहाली नापने का पैमाना है. आप किताबें जला सकते हैं, शिलालेख मिटा सकते हैं, लेकिन कंकाल की लंबाई नहीं बदल सकते” यहीं धर्म की कहानी पूरी तरह एक्सपोज हो जाती है.

धर्म कहता है तुम्हारी किस्मत भगवान लिखता है. साइंस कहता है तुम्हारी लंबाई का 80 से 90 प्रतिशत तुम्हारे जीन लिखते हैं और जीन मतलब मां-बाप से मिला डीएनए होता है. यह धर्म को पहला झटका है. क्योंकि अगर सब कुछ भगवान करता तो लंबाई भी वही देता, मां-बाप नहीं. 80 से 90 फीसदी जीन माँ बाप से सीधे ट्रांसफर होते हैं लेकिन असली खेल बाकी के 10-20 प्रतिशत में है. यह 10-20 प्रतिशत जीन परिवार, परिवेश और परवरिश से तय होते हैं. कोई अमीर है या गरीब, उसे खाना मिला या नहीं, बीमारी में महंगे हॉस्पिटल मिले या झाड़-फूंक. इन बातों का भी लम्बाई से सीधा रिश्ता होता है और यही सबसे बड़ा सबूत है धर्म के फेल होने का.

सोचिए, जीन तो सबके पास है. लेकिन एक बच्चा जो बचपन में रोज दाल-चावल, दूध, अंडा खाता है, जिसे पोलियो का टीका लगता है, जो साफ पानी पीता है, जो खुली हवा में खेलता है, उसकी लंबाई पूरी निकलती है. दूसरा बच्चा जो भूखा सोता है, जिसे हर दूसरे महीने दस्त लगते हैं, जिसे टीका नहीं मिला, जो बीड़ी के धुएं में बड़ा होता है उसकी लंबाई कम रह जाती है.

दोनों के जीन एक जैसे हो सकते हैं लेकिन एक 5 फीट 10 इंच का निकलता है, दूसरा 5 फीट 3 इंच का रह जाता है. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि इंसान की लंबाई भगवान नहीं, उसका पिनकोड, राशन कार्ड, जाति और अस्पताल तय करता है.

ऊंची जाति के लोग लंबे होते हैं, नीची जाति के लोग ठिगने होते हैं. धर्म ने हजारों साल तक कहा कि लंबा होना आशीर्वाद है और बौना होना पिछले जन्म का पाप है. ये सब गप्प थी. असलियत ये है कि ऊंची जाति के लोगों को पीढ़ियों से अच्छा खाना मिला इसलिए उनका कद ऊँचा रहा. नीची जाति के लोगों को जूठन मिली इसलिए वे छोटे रह गए. ये भगवान का न्याय नहीं था बल्कि यह इंसान का अन्याय था.

आज जब केरल का औसत कद बिहार से ज्यादा है तो इसकी वजह ये नहीं कि केरल के लोग ज्यादा धार्मिक हैं. इसकी वजह है कि केरल में बच्चों को बेहतर पोषण, बेहतर इलाज और बेहतर स्कूल मिलता है. सीधा सा गणित है कि जहां धर्म की जगह पोषण और दवा ने ली, वहां इंसान लंबा हो गया और जहां गरीबी, कुपोषण और जातिवाद हावी रहा, वहां इंसान का कद भी कम रहा. बड़ी जाति का कद और पद बड़ा रहा और छोटी जाति का कद और पद दोनों छोटा रह गया.

लंबाई सिर्फ जींस का बदलाव नहीं है बल्कि खुशहाली का पैमाना भी है. इसका मतलब है कि अगर आप किसी समाज की खुशहाली देखना चाहते हैं तो मंदिर की ऊंचाई मत देखिए बल्कि आपको वहां के लोगों की लंबाई देखनी चाहिए. मंदिर सोने का हो सकता है और उसके सामने खड़ा भक्त भूख से बौना हो सकता है. साइंस कहता है कि हाइट बढ़ने का सीधा मतलब है कि बेहतर खाना, साफ पानी, वैक्सीन, मां की बेहतर सेहत और बचपन में प्रोटीन भरपूर मिला.

100 साल पहले दुनिया में मां का दूध भी ठीक से नहीं मिलता था, आज अंडा, दाल, दूध है. यही 10 सेंटीमीटर के फर्क की वजह है. ये कोई चमत्कार नहीं है बल्कि यह सही पोषण और मेडिसिन की देन है. कोई ऋषि-मुनि की तपस्या से इंसानों का कद नहीं बढ़ा बल्कि नर्स, डॉक्टर और किसान की वजह से कद बढ़ा.

धर्म कहता है आदम 90 फीट का था. जरा सोचिए, 90 फीट का आदमी कैसे चलेगा? उसका दिल इतना बड़ा होगा कि खून पंप ही नहीं कर पाएगा. स्क्वायर क्यूब लॉ नाम का एक साधारण फिजिक्स का नियम है कि अगर आप इंसान को दोगुना लंबा करेंगे तो उसका वजन आठ गुना बढ़ेगा लेकिन हड्डी की मजबूती सिर्फ चार गुना ही रह जाएगी.

इसका मतलब यह है कि 90 फीट का आदमी अपनी ही हड्डियों के वजन से टूट जाएगा. क्या अल्लाह ने फिजिक्स नहीं पढ़ा था जब 90 फीट का इंसान बनाया? इसलिए Our World in Data का ये छोटा सा ग्राफ पूरी धर्मशास्त्र की लाइब्रेरी पर भारी पड़ गया है. यह साबित करता है कि इंसान आसमान से नीचे नहीं आया, नीचे से ऊपर गया है. वो घटा नहीं है, बढ़ा है. और आगे भी बढ़ेगा. Human Height Evolution

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