Religion Business: धर्म सिर्फ धंधा है और इस धंधे में भी वैसे ही लड़ाइयां होती हैं जैसे दूसरे धंधों में, खासतौर पर गैरकानूनी, गैरसामाजिक धंधों में जैसी होती हैं. धर्म के धंधे में मुफ्त की कमाई होती है और चंदे में मिले पैसे को बांटने के लिए देश भी लड़ते हैं, समुदाय भी लड़ते हैं और मंदिर, मसजिद व चर्च के लोग भी लड़ते हैं.
मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में रामलीला कमेटी के पैसों के बंटवारे को ले कर सूरज गुप्ता और कौशल गुप्ता के बीच गोलीबारी हो गई तो कोई आश्चर्य की बात नहीं. वैसे, वे दोनों ही मात्र ट्रेडर्स हैं लेकिन चंदे के धन ने उन्हें इस तरह बदल दिया कि वे बंदूकें ले कर चलने लगे. नतीजतन, गोलीबारी हुई. अंकित गुप्ता, मोहित गुप्ता और एक दर्शक कुनाल श्रीवास्तव की मौत हो गई. यानी, रामलीला कमेटी के ‘पुण्य’ काम पर हत्याएं कर डाली गईं.
रामलीलाओं, कांवड़ यात्राओं, रामनवमी यात्राओं, दुर्गा पूजा पंडालों, गणेश विसर्जन को ले कर देशभर में सैकड़ों कमेटियां बनती हैं जिन का मुख्य काम होता है कि वे आम दुकानदारों व घरों से जबरन चंदा वसूलें. यह चंद धमका कर ही लिया जाता है, कुछ ही अंधभक्त ऐसे होते हैं जो मोटा पैसा खुशीखुशी देते हैं.
जब पैसा, बिना कोई काम किए, मिलने लगता है, तो उस का बंटवारा मुश्किल हो जाता है. इन कामों में कोई हिसाब नहीं रखता. जिस की जेब में जो पैसा आया वह उस का, जैसा राम मंदिर की कमेटी में हुआ, जहां के आरोपी आज नहीं तो कल बरी हो जाएंगे और चंदाचोरी जारी रहेगी.
भक्तों को इस तरह अंधा बना दिया गया है कि वे यह सोचते हैं कि वह पैसा उन के खुद के काम का है, ऊपरवाले ने दिलवाया है, किसी और से शेयर करने की क्या जरूरत है. जो पैसा मौजमस्ती, ग्राहकों को बुलावे, आयोजन करने में खर्च हुआ वह तो ठीक है पर बाकी को पैसे कैसे बांटें क्यों बांटें, यह भगवान की दया पर नहीं बल्कि कमेटी वालों की अपनीअपनी हिम्मत और मसल पावर पर डिपैंड करता है.
अब रामलीला कमेटी वाले कमेटी में ही रामरावण युद्ध जैसा करने लगें तो क्या कोई बड़ी बात है. वैसे भी, पूरी रामलीला हिंसा और झगड़ा करना ही सिखाती है. पूरी रामकथा विवादों से भरी है- संपत्ति, राजसिंघासन का विवाद, नाक काटने का विवाद, अपहरण का विवाद, युद्ध का विवाद, शंबूक को मारने का विवाद, लक्ष्मण से नाराजगी का विवाद, लवकुश से विवाद.
अब जब महान भगवान की पूरी जिंदगी विवादों में घिरी रहे तो बेचारे सूरज गुप्ता, कौशल गुप्ता, अंकित गुप्ता और मोहित गुप्ता, जो न भगवान हैं न ब्राह्मण, न क्षत्रिय, का क्या दोष. उन्होंने तो वह किया जो उन्हें पाठ में पढ़ाया गया था. कुछ लोग धर्म की बलि चढ़ गए तो यह भगवान की इच्छा है, उस की कृपा है. शायद, अगले जन्म में वे भगवान का अवतार बन कर पैदा हों. Religion Business




