Raftaar Movie: राज कुमार राव एक सषक्त अभिनेता हैं,इसमें कोई दो राय नहीं.उनकी पत्नी पत्रलेखा भी बेहतरीन अभिनेत्री हैं.मगर इन दिनों बौलीवुड के गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं कि राज कुमार राव खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं. इसकी वजह यह है कि सोलह अक्टूबर को राज कुमार राव की मुख्य भूमिका वाली दो फिल्में ‘‘प्रहारः द अनटोल्ड स्टोरी आफ उज्जवल निकम’’ और ‘‘रफ्तार’’ सिनेमाघरों में पहुॅच रही हैं. ‘‘प्रहारः द अनटोल्ड स्टोरी आफ उज्जवल निकम’’ में वह केवल अभिनेता हैं, जबकि ‘‘रफ्तार’ में अभिनय करने के साथ साथ राज कुमार राव ने अपनी पत्नी पत्रलेखा के साथ मिलकर अपनी होम प्रोडक्षन कंपनी ‘‘कैंपा फिल्मस’’ के तहत निर्माण भी किया.

वैसे फिल्म ‘रफ्तार’ के निर्माण अमेजान यानीकि एमजीएम स्टूडियो का भी सहयोग है. और यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कलर येलो प्रोडक्षन और एमजीएम स्टूडियो की फिल्म ‘‘नयी नवेली’’ भी 16 अक्टूबर को ही रिलीज हो रही है. यानी जिस फिल्म में राज कुमार राव का अपना पैसा और अपना कारोबारी हित दांव पर है, उसी फिल्म के सामने उनकी दूसरी फिल्म खड़ी है.

ऐसे में यह सवाल उठता लाजिमी है कि क्या राजकुमार राव अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं? क्या वह अपनी ही फिल्म का नुकसान होते हुए देखने का जोखिम उठा रहे हैं? या फिर इस कहानी के पीछे कोई ऐसी वजह या राणनीति है, जिसके बारे में हम या दर्षक नहीं समझ पा रहे हैं?

एक ही दिन अपनी दो फिल्मों को रिलीज करने को लेकर राज कुमार राव पर कई सवाल उठ रहे हैं.पर यह कहना गलत होगा कि राज कुमार राव की इसमें गलती है. पहले ‘रफ्तार’ को जुलाई माह में रिलीज होना था,मगर मई माह में ही ऐलान कर दिया गया था कि ‘रफ्तार’ जुलाई की बजाय 16 अक्टूबर को रिलीज होगी.

मैडॉक फिल्मस की फिल्म ‘‘प्रहारः द अनटोल्ड स्टोरी आफ उज्जवल निकम’ पहले सात अगस्त को रिलीज होनी थी, लेकिन जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में फिर इसकी तारीख बदलकर 16 अक्टूबर कर दी गयी. सवाल यह उठाया जा रहा है कि राज कुमार राव ने ‘प्रहार’ के निर्माता से बात कर फिल्म की रिलीज की तारीख क्यों नहीं बदलवायी.दूसरी बात राज कुमार राव ‘प्रहार’ के प्रचार के लिए उज्ज्वल निकम के साथ षहर दर षहर भटक रहे हैं.पर ‘रफ्तार’ का प्रचार नहीं कर रहे.

बॉलीवुड का इतिहास क्या कहता है?,

इतिहास गवाह है कि एक कलाकार की जब भी दो फिल्में एक ही दिन रिलीज हुई हैं,दोनों को नुकसान ही हुआ है. जी हॉ!..बौलीवुड में एक ही दिन रिलीज हुई फिल्मों के उदाहरण पहले भी मौजूद हैं…
22 अक्टूबर 1993 को सलमान खान की दो फिल्में ‘‘चंद्रमुखी’ और ‘दिल तेरा आषिक’’रिलीज हुई थीं,दोनों ने बाक्स आफिस पर पानी नहीं मांगा था.

11 अगस्त 1995 को शाहरुख खान की ‘गुड्डू’ और ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया!’ रिलीज हुई थीं. दोनों फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर निराशा का सामना करना पड़ा.

23 जनवरी 2004 को अमिताभ बच्चन की ‘खाकी’ और ‘ऐतबार’ रिलीज हुईं. लेकिन दोनों का परिणाम एक जैसा नहीं रहा. ‘खाकी’ औसत रही, जबकि ‘ऐतबार’ बुरी तरह से असफल रही.

16 अक्टूबर 2009 को ‘ब्लू’ और ‘ऑल द बेस्ट: फन बिगिन्स’ रिलीज हुईं. ‘ब्लू’ असफल रही, लेकिन ‘ऑल द बेस्ट’ ने भी कुछ खास नही किया…

कहने के लिए तो राज कुमार राव कह सकते हैं कि इन उदाहरणों से यह साबित नहीं होता कि एक ही दिन रिलीज हुई दो फिल्में हमेशा असफल होती हैं. लेकिन यह उदाहरण जरूर बताते हैं कि फिल्म की रिलीज डेट और बाजार की परिस्थितियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता. और राजकुमार राव के मामले में चुनौती कुछ अलग है. यहां केवल दो फिल्मों के बीच मुकाबला नहीं है. यहां एक ही अभिनेता की दो फिल्मों के बीच दर्शकों का ध्यान बंटने की आशंका भी है.

इसलिए सवाल यह नहीं कि इतिहास खुद को दोहराएगा या नहीं. सवाल यह है कि क्या इस इतिहास से कोई सबक लिया गया?

अब ‘‘प्रहार’ और ‘रफ्तार’ के सब्जेक्ट की भी तुलना होनी चाहिए. ‘प्रहार:द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ में राजकुमार राव देश के चर्चित सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की भूमिका निभा रहे हैं. फिल्म 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद अजमल कसाब के खिलाफ चली कानूनी लड़ाई पर केंद्रित है.यह ऐसा विषय है, जिसमें देशभक्ति, आतंकवाद, न्याय और अदालत की लड़ाई जैसे कई तत्व मौजूद हैं.फिल्म के ट्रेलर को लेकर चर्चा हुई है और इसका प्रचार भी दिखाई दे रहा है.

दूसरी तरफ ‘रफ्तार’ की कहानी एडटेक इंडस्ट्री की दुनिया में महत्वाकांक्षा, कारोबार और सफलता के संघर्ष पर आधारित है. इसमें राजकुमार राव और कीर्ति सुरेश प्रमुख भूमिकाओं में हैं. फिल्म का निर्देशन आदित्य निंबालकर ने किया है और पत्रलेखा इसकी निर्माता हैं.यानी एक तरफ कॉर्पाेरेट का ग्लैमर और लालच है, तो दूसरी तरफ कानून की लड़ाई और कड़क डायलॉगबाजी!

दोनों फिल्मों की कहानियां अलग हैं. इसलिए सैद्धांतिक रूप से दोनों के दर्शक भी अलग हो सकते हैं. लेकिन फिल्म की कहानी कितनी भी अच्छी क्यों न हो, अगर दर्शकों को उसके बारे में पता ही नहीं चलेगा, तो वह उसे देखने कैसे पहुंचेंगे?

‘रफ्तार’ के निर्माण में राजकुमार राव और पत्रलेखा जुड़े हैं. यानी फिल्म का भविष्य उनके लिए केवल अभिनय की सफलता का मामला नहीं, बल्कि निर्माता के तौर पर भी महत्वपूर्ण है. फिर भी राजकुमार राव और पत्रलेखा दोनों अपनी फिल्म ‘‘रफ्तार’ को लेकर सोषल मीडिया पर भी खामोष हैं…

तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या राजकुमार राव की प्राथमिकता ‘प्रहार’ बन गई है? क्या ‘रफ्तार’ को अपेक्षित प्रचार नहीं मिल पा रहा? क्या यह केवल संयोग है कि दोनों फिल्में एक ही दिन रिलीज हो रही हैं? या फिर कोई ऐसी व्यावसायिक गणना है, जिसे दर्शक अभी नहीं समझ पा रहे? Raftaar Movie

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