Pew Research: जब सत्ता सच से डरती है तो वह सबसे पहले झूठ की फैक्ट्री लगाती है. भारत में पिछले 12 साल से यही हो रहा है. बीजेपी सरकार ने गोदी मीडिया को खरीद लिया, चुनाव आयोग को अपना दफ्तर बना लिया और सोशल मीडिया पर आईटी सेल के हजारों ट्रोल्स को झूठ फैलाने के लिए छोड़ दिया लेकिन प्यू रिसर्च सेंटर की ताजा रिपोर्ट ने इस झूठ की फैक्ट्री में विस्फोट कर दिया है. अक्टूबर 2026 की इस नई स्टडी में भारत को लेकर जो आंकड़े आए हैं, वो बीजेपी के लिए आईने से कम नहीं हैं.
प्यू रिसर्च सेंटर की ताजा रिपोर्ट अक्टूबर 2026 में आई है और इस रिपोर्ट ने बीजेपी की पूरी आईटी सेल वाली राजनीति को नंगा कर दिया है. प्यू ने इस बार 37 देशों में 45,658 लोगों का सर्वे किया है. 10 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को इसमें शामिल किया गया था. रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर में लोग सोशल मीडिया को लोकतंत्र के लिए खतरा मानने लगे हैं.
क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र के लिए बुरा है? इस सवाल के जवाब में अमेरिका में 64 परसेंट लोग कहते हैं कि बुरा है. जर्मनी में 61 परसेंट लोग ऐसा कहते हैं और नीदरलैंड में 70 परसेंट लोग कहते हैं कि ये बुरा है लेकिन भारत में इसका उल्टा है. भारत में 66 परसेंट लोग अभी भी मानते हैं कि सोशल मीडिया लोकतंत्र के लिए अच्छी चीज है, सिर्फ 23 परसेंट लोग इसे बुरा मानते हैं.
अब यहीं पर बीजेपी की पोल खुल जाती है. रिपोर्ट का दूसरा हिस्सा देखिए जो बीजेपी नहीं बताएगी. इसी 66 परसेंट में से 62 परसेंट भारतीय मानते हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट की वजह से लोगों को झूठी अफवाहों से बेवकूफ बनाना आसान हो गया है और 51 परसेंट लोग मानते हैं कि इसने लोगों को राजनीतिक रूप से ज्यादा बांट दिया है. इसका मतलब यह है कि जनता सोशल मीडिया को अच्छी चीज मानती है लेकिन उसी जनता को पता है कि इसी सोशल मीडिया पर बीजेपी की आईटी सेल ने झूठ का कारखाना खोल रखा है.
असल में जो 62 परसेंट लोग कह रहे हैं कि झूठी अफवाहों से लोगों को फंसाया जा रहा है यह इशारा सीधे सीधे बीजेपी की तरफ है. पिछले 10 साल में बीजेपी ने व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी, फेक न्यूज, नकली वीडियो और आईटी सेल के 2 रुपये वाले ट्रोल्स से जो नफरत का बाजार बनाया है, जनता उसे पहचान चुकी है. जनता कह रही है सोशल मीडिया अच्छा है लेकिन बीजेपी ने इसे गंदा कर दिया है और 51 परसेंट लोग जो कह रहे हैं कि राजनीतिक बंटवारा बढ़ा है, वो भी बीजेपी की देन है. हिन्दू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद, भारत-पाकिस्तान, यही तो बीजेपी का असली कंटेंट है.
प्यू की रिपोर्ट बता रही है कि भारत के लोग दुनिया से ज्यादा लोकतांत्रिक हैं, वो अभी भी सोशल मीडिया पर भरोसा करते हैं लेकिन बीजेपी उसी भरोसे को झूठ और नफरत के जरिये खत्म कर रही है. दुनिया में जहां लोग सोशल मीडिया से थक चुके हैं, भारत में लोग अभी भी उसे सच का हथियार मानते हैं और यही सच 10 अक्टूबर से जंतर-मंतर पर दिखाई पड़ रहा है.
कुल मिलाकर प्यू की यह रिपोर्ट एक बात साफ कर रही है कि भारत का वोटर अभी भी मूर्ख नहीं बना है. वह सोशल मीडिया को लोकतंत्र के लिए अच्छा मानता है क्योंकि उसे लगता है कि यहीं पर उसे गोदी मीडिया से अलग सच मिलता है लेकिन 62 परसेंट की बड़ी संख्या में लोग यह भी मान रहे है कि इसी सोशल मीडिया को बीजेपी ने झूठ और अफवाहों का अड्डा बना दिया है. यह रिपोर्ट बीजेपी के लिए खतरे की घंटी है. व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और फेक न्यूज का खेल अब ज्यादा दिन नहीं चलेगा. जनता ने पहचान लिया है कि कौन लोकतंत्र को जोड़ रहा है और कौन बांट रहा है? यही वजह है कि आज मेरठ से लेकर काशी तक और लखनऊ से लेकर जंतर-मंतर तक जनता सड़कों पर है.




