lethal Injection:  1995 में नॉक्सविले में 18 साल की क्रिस्टा ने अपनी क्लासमेट 19 साल की कोलिन स्लेमर की बेरहमी से हत्या कर दी थी. जुर्म इतना वीभत्स था कि 1996 में उसे मौत की सजा सुनाई गई. तब से वह 30 साल से डेथ रो में थी. टेनेसी में 200 साल में किसी महिला को मौत की सजा नहीं हुई थी, पाइक पहली ऐसी औरत होती जिन्हें जहर के इंजेक्शन से मौत के घाट उतारा जाता. पूरी तैयारी थी, दो जहरीले इंजेक्शन लगा दिए गये. गवाहों के सामने पर्दा खुला और बंद हुआ लेकिन कैदी की सांसें चलती रहीं. हॉस्पिटल ले जाया गया जहां डॉक्टर्स ने उसकी दिल की धड़कनों को सुना. वह बेहोश थी लेकिन उसका दिल, दिमाग़, फेफड़े और किडनी काम कर रहे थे. हॉस्पिटल की आईसीयू में पड़ी इस पेशेंट की खर्राटों की आवाज ने पूरे अमेरिकी न्याय तंत्र को हिला दिया. यह कहानी है क्रिस्टा गेल पाइक की जो मरने के लिए गई थी और जिंदा लौट आई.

30 सितंबर को सुबह 10 बजे फांसी तय थी. इस सजा को रद्द करने के लिए निचली अदालत में अपील दायर की गई थी जिसपर फैसला भी आ गया था. कोर्ट ने एक घंटे पहले रोक लगाई लेकिन शाम को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निचली कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया. रात को रिवरबेंड जेल में क्रिस्टा को चैंबर में लाया गया. प्रोटोकॉल के मुताबिक उसे गावाहों के सामने पेंटोबार्बिटल का पहला डोज दिया गया. गवाहों ने देखा, पर्दा बंद हुआ लेकिन अंदर से सांसों की आवाज आती रही. पर्दा दोबारा खुला तो पाइक खर्राटे ले रही थी. तुरंत दूसरा डोज दिया गया जो प्रोटोकॉल का आखिरी विकल्प था. उसके बाद भी वह जिंदा थी. करीब एक घंटे तक गवाह उसकी सांसें सुनते रहे. फिर माइक काट दिया गया, गवाहों को बाहर कर दिया गया और एंबुलेंस उसे अस्पताल ले गई.

टेनेसी का मैनुअल यह नहीं बताता कि दूसरे डोज के बाद भी कैदी जिंदा रहे तो क्या किया जाए? जेल विभाग ने कहा हमने हर स्टेप फॉलो किया लेकिन डेथ पेनल्टी एक्सपर्ट रॉबिन महर ने इसे अमेरिकी इतिहास की सबसे भयानक असफल मौत की सजाओं में से एक बताया.

इस घटना को देखते हुए गवर्नर बिल ली ने 2026 के अंत तक सारी फांसियां रोक दी हैं और थर्ड पार्टी जांच बैठा दी है. कानूनी रूप से पाइक की मौत की सजा अभी खत्म नहीं हुई है. दोबारा तारीख तय हो सकती है लेकिन वकील अब इसे अमेरिकी संविधान के 8वें संशोधन के खिलाफ बता रहे हैं. 1947 में विली फ्रांसिस मामले में बिजली का झटका झेलने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा फांसी की इजाजत दी थी लेकिन क्रिस्टा के मामले में तो दो पूरे केमिकल डोज दिए जा चुके हैं.

यह मामला सिर्फ एक कैदी की सजा का नहीं है बल्कि यह घटना सजा-ए-मौत की पूरी नैतिकता पर सवाल खड़े करती है. पाइक क्रिस्टा 18 साल की उम्र के गुनाह की सजा 50 साल की उम्र में भुगत रही है. स्टेट ने उसे दो जहरीले इंजेक्शन से मौत की सजा देने का अपना कानून निभाया लेकिन वह बच गई तो इसमें उसका क्या दोष है? अब उसे फिर से मौत की इस खौफनाक प्रक्रिया से गुजारने का क्या औचित्य बनता है? अब यह तो अदालत को तय करना है कि यह जेल प्रशासन की विफलता थी या इंसाफ के नाम पर की जा रही क्रूरता का सबूत था? lethal Injection

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