Friendship and Money: कुछ दोस्त हमारी जिंदगी में ऐसे होते हैं जिन से हमारा रिश्ता किसी मतलब या जरूरत से शुरू नहीं होता. वे हमारे साथ तब से होते हैं जब हमें पैसे, कैरियर, स्टेटस और भविष्य की इतनी समझ भी नहीं होती. स्कूल की बैंच से ले कर कालेज की कैंटीन तक, साथ घूमने से ले कर रातरातभर बातें करने तक, इन दोस्तों के साथ हमारी जिंदगी के कई साल बीतते हैं. उस वक्त किसी ने यह नहीं सोचा होता कि आगे चल कर किस की सैलरी कितनी होगी, कौन किस कंपनी में काम करेगा या कौन फाइनैंशियली कितना मजबूत होगा.
लेकिन बड़े होने के बाद जिंदगी बदलने लगती है. कोई अच्छी नौकरी हासिल कर लेता है, कोई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता रहता है, कोई बिजनैस शुरू करता है और किसी को लंबे समय तक नौकरी नहीं मिलती. कुछ लोग अपने कैरियर में तेजी से आगे बढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग लगातार संघर्ष कर रहे होते हैं. धीरेधीरे दोस्तों के बीच सिर्फ उम्र और अनुभव का नहीं, बल्कि कमाई और जीवनशैली का भी अंतर दिखाई देने लगता है.
यह अंतर तब ज्यादा महसूस होता है जब दोस्त मिल कर घूमनेफिरने, बाहर खाना खाने या ट्रिप पर जाने का प्लान बनाते हैं. एक दोस्त के लिए हजार या दो हजार रुपए खर्च करना सामान्य बात हो सकती है जबकि दूसरे के लिए यही रकम पूरे महीने के बजट को बिगाड़ सकती है. ऐसे में कई बार लगता है कि क्या फाइनैंशियली रूप से कमजोर दोस्तों के साथ पहले जैसा मिलनाजुलना जारी रखना चाहिए या अपनी फाइनैंशियली स्थिति के हिसाब से दोस्ती में भी बदलाव करना चाहिए?
दोस्ती में पैसों की बात शुरू कैसे होती है?
जब हम छोटे होते हैं तो दोस्ती का आधार बहुत सीधा होता है. जिस के साथ अच्छा लगता है उस के साथ दोस्ती हो जाती है. हम यह नहीं देखते कि उस के मातापिता क्या करते हैं, वह कितने बड़े घर में रहता है या भविष्य में वह कितना कमाएगा. लेकिन उम्र बढ़ने के साथ हमारी जरूरतें और प्राथमिकताएं बदलने लगती हैं.
कालेज खत्म होने के बाद कोई दोस्त मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी कर सकता है, तो कोई छोटी कंपनी में कम सैलरी पर काम कर रहा होता है. किसी को घर से फाइनैंशियली मदद मिल रही होती है, जबकि कोई अपने परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रहा होता है. कुछ लोगों को सही अवसर जल्दी मिल जाते हैं, जबकि कुछ लोग योग्यता होने के बावजूद बेरोजगारी या कम सैलरी से जूझते रहते हैं.
ऐसी सिचुएशन में दोस्ती में फाइनैंशियल डिफरैंसेस आना स्वाभाविक हैं. समस्या तब शुरू होती है जब यह अंतर दोस्ती के फैसलों को प्रभावित करने लगता है. अगर हर बार मिलने का मतलब महंगे कैफे में जाना, बाहर खाना या लंबी ट्रिप पर खर्च करना हो, तो कम कमाई वाले दोस्त को असहजता महसूस हो सकती है. वहीं, ज्यादा कमाने वाले दोस्त को लगातार खर्च उठाने का दबाव महसूस हो सकता है.
जब हर प्लान का खर्च एक ही दोस्त उठाने लगे
दोस्ती में एकदूसरे के लिए खर्च करना कोई नई बात नहीं है. कभी दोस्त के पास पैसे नहीं होते, तो दूसरा उस की मदद कर देता है. कभी किसी का जन्मदिन होता है, तो दोस्त मिल कर उसे ट्रीट देते हैं. कभी किसी के पास नौकरी नहीं होती, तो उस के दोस्त उसे बाहर बुला कर उस का मन हलका करने की कोशिश करते हैं. इन छोटीछोटी चीजों से रिश्ते में अपनापन महसूस होता है.
लेकिन जब यही हर बार होने लगे, तो परिस्थितियां बदल सकती हैं. मान लीजिए, 5 दोस्तों का एक ग्रुप है और उन में से सिर्फ 2 दोस्त अच्छी कमाई करते हैं. हर बार घूमने का प्लान बनता है, तो बाकी 3 दोस्तों का खर्च भी इन्हीं 2 दोस्तों को उठाना पड़ता है. शुरुआत में वे खुशीखुशी ऐसा करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें लग सकता है कि उन के बजट पर इस का असर पड़ रहा है.
कई बार हम अपने दोस्तों को मना करने में झिझकते हैं. हमें लगता है कि अगर हम ने खर्च करने से इनकार कर दिया, तो सामने वाला हमें कंजूस समझेगा या उसे बुरा लगेगा. लेकिन एक मजबूत रिश्ता ऐसा होना चाहिए कि जिस में अपनी फाइनैंशियल बाउंड्रीज के बारे में बात करने के लिए किसी को शर्मिंदगी महसूस न हो.
क्या कम कमाने वाले दोस्त से दूरी बना लेना सही है?
आप का एक दोस्त बचपन से आप के साथ है. उस ने आप के बुरे वक्त में आप का साथ दिया है. जब आप का रिश्ता टूटा था, तब उस ने आप को संभाला था. जब आप कैरियर को ले कर परेशान थे, तब उस ने आप की बातें सुनी थीं. जब आप खुद पर विश्वास खो रहे थे, तब उस ने आप को हिम्मत दी थी.
आज आप की नौकरी अच्छी है, लेकिन वह दोस्त अभी संघर्ष कर रहा है. उस की सैलरी कम है या वह नौकरी की तलाश में है. अब जब भी आप दोनों मिलते हैं, तो अकसर खर्च आप को उठाना पड़ता है. ऐसे में आप के मन में यह विचार आता है कि शायद उस से कम मिलनाजुलना बेहतर होगा.
यह विचार आना अपनेआप में आप को बुरा इंसान नहीं बनाता. फाइनैंशियल प्रैशर और लगातार खर्च की परेशानी वाजिब हो सकती है. हर व्यक्ति को अपनी कमाई, बचत और भविष्य की जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए. लेकिन सिर्फ कम कमाई के कारण किसी दोस्त की इंसान के तौर पर अहमियत कम कर देना एक अलग बात है.
अगर किसी दोस्त के साथ महंगा प्लान करना आप के बजट पर भारी पड़ रहा है, तो आप प्लान बदल सकते हैं. अगर हर सप्ताह बाहर खाना महंगा पड़ रहा है, तो महीने में एक बार मिल सकते हैं. अगर लंबी ट्रिप का खर्च संभालना मुश्किल है, तो कम बजट में कहीं घूमने का विकल्प चुन सकते हैं. दोस्ती निभाने के लिए हर बार महंगा खर्च करना जरूरी नहीं.
कभीकभी एक कप चाय के साथ बैठ कर बातचीत करना, घर पर मिलना या पार्क में टहलना भी उतना ही अच्छा समय दे सकता है, जितना किसी महंगे रैस्तरां में बिताया गया समय.
दोस्ती में सिर्फ पैसे का योगदान ही सबकुछ नहीं होता
आजकल जब हम दोस्तों के साथ बाहर जाते हैं, तो कई बार यह सोचने लगते हैं कि कौन कितना खर्च कर रहा है. बिल किस ने दिया, किस ने कितनी बार ट्रीट दी और किस ने किस की मदद की.
एक दोस्त पैसे से मदद कर सकता है, तो दूसरा अपने समय और इमोशनल सपोर्ट से. किसी दोस्त को नौकरी ढूंढने में मदद करना, उस का रिज्यूमे देखना, इंटरव्यू की तैयारी करवाना या मुश्किल समय में उस का साथ देना भी महत्त्वपूर्ण योगदान है. हालांकि, इस का मतलब यह नहीं कि इमोशनल सपोर्ट के बदले किसी से फाइनैंशियली मदद की उम्मीद रखना उचित है. हर रिश्ते में योगदान अलगअलग रूप में हो सकता है.
अपनी फाइनैंशियल बाउंड्रीज बताना सैल्फिशनेस नहीं
समाज में कई बार लोगों को अपनी फाइनैंशियल बाउंड्रीज बताने में झिझक होती है, खासकर तब, जब सामने वाला कोई पुराना दोस्त हो. हमें लगता है कि अगर हम ने कहा कि इस महीने बजट कम है या हम महंगी जगह नहीं जा सकते, तो सामने वाला हमें बदल हुआ इंसान समझेगा.
लेकिन जीवन में हर व्यक्ति की फाइनैंशियल स्थिति बदलती रहती है. आज अच्छी सैलरी होने के बावजूद कल नौकरी जाने, परिवार की जिम्मेदारी बढ़ने या किसी जरूरी खर्च के कारण बजट सीमित हो सकता है. अगर आप खर्च नहीं उठा सकते, तो सीधे और रिस्पैक्टफुली बात कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, आप कह सकते हैं, ‘इस महीने मेरा बजट थोड़ा टाइट है, इसलिए कोई कम खर्च वाला प्लान बनाते हैं.’
हर दोस्ती को बचाए रखना जरूरी है क्या?
बचपन की दोस्ती का काफी महत्त्व होता है, लेकिन हर पुराना रिश्ता जीवनभर उसी रूप में बना रहे, यह जरूरी नहीं. उम्र के साथ लोगों की प्रायोरिटीज, सोच और लाइफस्टाइल बदलती हैं. कभीकभी दोस्ती में दूरी आना सामान्य है. लेकिन फाइनैंशियल अंतर के कारण किसी रिश्ते में बदलाव हो रहा है, तो पहले यह देखना चाहिए कि समस्या वास्तव में पैसों की है या आपसी समझ और व्यवहार की.
अगर कोई दोस्त आप की फाइनैंशियल स्थिति का फायदा उठाता है, आप की सीमाओं का सम्मान नहीं करता या लगातार आप पर खर्च करने का दबाव डालता है, तो इस व्यवहार पर बात करना जरूरी है.
पुराने दोस्तों के लिए खर्च करना प्यार का हिस्सा है?
दोस्त पर खर्च आप की अपनी इच्छा से किया जा रहा है और आप की पौकेट इस की अनुमति देती है, तो पुराने दोस्तों के लिए खर्च करना प्यार और अपनापन दिखाने का एक तरीका हो सकता है. हम अपने दोस्तों के लिए जन्मदिन पर गिफ्ट खरीदते हैं, उन्हें खाना खिलाते हैं या कभी उन की मदद करते हैं. इस में कुछ गलत नहीं है.
लेकिन प्यार को हमेशा पैसों के माध्यम से साबित करने की जरूरत नहीं है. अगर आप किसी दोस्त से मिलना चाहते हैं, तो जरूरी नहीं कि हर मुलाकात महंगे कैफे या रैस्तरां में हो. साथ बैठ कर बात करना, उस की परेशानी सुनना, नौकरी की तलाश में मदद करना या उस के किसी खास दिन पर साथ खड़ा होना भी रिश्ते को मजबूत कर सकता है. Friendship and Money





