Domestic Violence: यह कहानी एक ऐसे रिश्ते की है जिसमें भरोसा था, प्यार था और एक दूसरे का साथ भी था लेकिन इस खूबसूरत से दिखने वाले रिश्ते के भीतर घिनौनी मर्दवादी मानसिकता भी छिपी थी. कांसेंट के बिना एक औरत रोज बलात्कार का शिकार होती थी और हैरानी की बात यह कि महिला को पता भी नहीं चलता था. क्या है पूरा मामला आइये जानते हैं.
ब्रिटेन की 46 साल की एडेल ओवरटन और 44 साल के स्टीवन यूडेन की कहानी अजीब मोड़ पर खत्म हुई. बाहर से देखने पर ये एक आम रिश्ता था. दोनों 13 साल से ज्यादा समय तक साथ रहे, इस बीच एक ही छत के नीचे जिंदगी बिताई, रोज की वही लड़ाई, वही समझौता लेकिन पर्दे के पीछे एक ऐसी हिंसा पल रही थी, जिसे खुद एडेल ओवरटन भी लंबे समय तक नहीं समझ पाई. एडेल को बहुत बाद में एहसास हुआ कि जब वो गहरी नींद में होती थी तब उसका साथी उसके शरीर के साथ वो सब कर रहा होता था, जिसके लिए उसने कभी हां नहीं कहा था.
ओवरटन अब जानती है कि यूडेन का व्यवहार उनकी कल्पना से कहीं ज़्यादा भयावह था. जब 2020 में वो स्तन कैंसर के लिए कीमोथेरेपी करा रही थीं तब पहली बार उन्हें इसका संदेह हुआ था. वह कहती हैं, “मुझे नहीं पता कि मेरे शरीर में बेचैनी थी या क्या था लेकिन जब वह ऐसा कर रहा था तब मैं जाग गई. उसने ढेरों बहाने बनाए जैसे, ‘मुझे लगा कि तुम जाग रही हो और तुम्हें पता है कि क्या हो रहा है.”
ओवरटन के अनुसार, यह बातचीत दो दिनों तक चली, और इसी दौरान यूडेन ने एक दोस्त को फोन किया और अपने किए के बारे में बताया. फिर घर लौटकर ओवरटन के सामने अपना जुर्म कबूल किया. ओवरटन को धोखा महसूस हुआ और घिन भी आई लेकिन उन्होंने तुरंत रिश्ता खत्म नहीं किया. उन्हें लगा कि वह यूडेन पर निर्भर थीं और उससे प्यार भी करती थीं. ओवरटन पहले से ही यौन शोषण से जुड़े ट्रॉमा से निपटने के लिए थेरेपी ले रही थीं और अपने सेशन में उन्होंने इसका ज़िक्र भी किया. वह कहती हैं: “एक थेरेपिस्ट ने मुझे इससे बाहर निकाला क्योंकि मैं पूरी तरह से टूट चुकी थी, मैं फूट-फूट कर रो रही थी और कह रही थी, ‘मैं क्या करूं? मैं उसे ऐसा करने से कैसे रोकूं?’ और थेरेपिस्ट ने इस पूरे मामले के बारे में पुलिस को बता दिया और उस समय मुझे एक तरह से पता चल गया कि यह मामला मेरे हाथ से बाहर था.”
यह मामला ब्रिटेन की डर्बीशायर पुलिस की डिटेक्टिव सार्जेंट एलेनोर किर्टन को सौंपा गया. ओवरटन का इंटरव्यू लेने के बाद पुलिस ने यूडेन को गिरफ़्तार कर लिया. उसने तुरंत ही यह मान लिया कि उसने ओवरटन के साथ बलात्कार किया था. यूडेन पर बलात्कार के दो मामलों का आरोप लगाया गया था. बाद में उसने अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उसे छह साल और आठ महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई.
हमारे दिमाग में बलात्कार का मतलब आज भी एक अनजान आदमी, एक सुनसान जगह और एक औरत की चीख होती है. कानून, फिल्में, अखबार, सब ने हमें यही सिखाया है लेकिन आंकड़े और औरतों की सच्ची कहानियां कुछ और ही कहती हैं. दुनिया में सबसे ज्यादा यौन हिंसा उन मर्दों द्वारा की जाती है, जिन पर औरतें सबसे ज्यादा भरोसा करती हैं. पति, प्रेमी, लिव-इन पार्टनर और इसीलिए ये सबसे ज्यादा अदृश्य हिंसा होती है क्योंकि जब अपराधी आपका अपना हो तो समाज आपसे सबूत नहीं, सब्र मांगता है. कहा जाता है कि अरे, वो तो तुम्हारा पति है, तुम्हारा बॉयफ्रेंड है, 13 साल से साथ हो, इसमें रेप कैसा?
यही सोच एडेल जैसी हजारों औरतों को सालों तक चुप रखती है. उन्हें लगता है कि अगर वो अपने ही बिस्तर पर सुरक्षित नहीं हैं तो इसमें उनकी ही कोई गलती होगी. उन्हें लगता है कि शादी या लंबे रिश्ते के बाद उनके शरीर पर उनका अकेले का हक खत्म हो जाता है. पितृसत्ता ने औरतों को यही सिखाया है कि तुम्हारा शरीर तुम्हारा नहीं, परिवार की इज्जत है, पति की जरूरत है और मर्जी हो या न हो जिस्म को सौंप देना रिश्ते को बचाने का एक टूल है. जब औरत खुद को या अपने शरीर को टूल समझने लगती है तो वो अपने साथ हो रहे अपराध को भी अपनी ड्यूटी समझ लेती है.
सबसे बुनियादी सिद्धांत है कि सहमति हर बार की होनी चाहिए. सोती हुई औरत सहमति नहीं दे सकती. डरी हुई, नशे में या नींद में बेहोश औरत की खामोशी को हां समझना, यह मर्दवादी चालाकी है. असल में कंसेंट का मतलब सिर्फ ना ना कहना नहीं है बल्कि साफ तौर पर हां कहना है. एडेल का केस इसीलिए इतना भयानक है क्योंकि इसमें औरत के पास ना कहने का मौका ही खत्म कर दिया गया था. जब वो चेतना में ही नहीं थी तो वो विरोध कैसे करती? और इस असहाय अवस्था का फायदा उठाना, यौन हिंसा का सबसे कायराना रूप है. ये सिर्फ शरीर पर हमला नहीं, बल्कि औरत की चेतना, उसकी एजेंसी और उसकी इंसानियत पर भी हमला है.
जब आपको पता चलता है कि जिस बिस्तर पर आप सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करती थीं वहीं पर आपके साथ सबसे बड़ा धोखा हुआ है तो आपका भरोसा सिर्फ उस आदमी से नहीं, खुद से भी उठ जाता है. कई पीड़िताएं खुद को ही दोष देने लगती हैं कि मुझे पता क्यों नहीं चला? मैं जाग क्यों नहीं गई? क्या मुझमें ही कोई कमी है? एडेल का यह कहना कि मुझे पता ही नहीं थ. दरअसल यह उसकी नासमझी नहीं बल्कि उस गैसलाइटिंग का सबूत है जो समाज ने उसके साथ की है.
औरत को कभी बताया ही नहीं गया कि सोते हुए शरीर के साथ कुछ भी करना रेप है. उसे कभी बताया ही नहीं गया कि शादी के बाद भी उसका शरीर सिर्फ उसी का है इसलिए ये कहानी सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं है. यह एक चेतावनी है कि हमें अपनी बेटियों को गुड टच बैड टच से आगे की बात भी सिखानी होगी. उन्हें सिखाना होगा कि तुम्हारा शरीर सिर्फ तुम्हारी प्रॉपर्टी ही नहीं बल्कि तुम्हारी पहचान भी है और इस पहचान पर पहला और आखिरी हक सिर्फ तुम्हारा है, चाहे सामने 13 दिन का बॉयफ्रेंड हो या 13 साल का पति. नींद में किया गया कोई भी यौन कृत्य, प्यार नहीं, अधिकार का वहम है और अधिकार के वहम से बड़ा बलात्कार कोई नहीं होता. Domestic Violence





