Muslim Women Success: इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता चमन आरा और उनकी बहन अधिवक्ता शबिस्ता परवीन को पीडीए यानि प्रयागराज विकास प्राधिकरण की पैनल अधिवक्ता नियुक्त किया गया है. दोनों बहनों को मिली इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से कैराना इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है. यूपी की दो सगी बहने चमन आरा और शबिस्ता परवीन पीडीए का पैनल अधिवक्ता बनना महज एक छोटी सी खबर नहीं है बल्कि यह मुस्लिम समाज के अंदर हो रहे बड़े बदलाव का सबूत है.
बरसों तक मुस्लिम लड़कियों के लिए यही दो रास्ते तय किए गए थे कि या तो कम उम्र में निकाह कर लो या घर में बैठकर चूल्हा चौका संभालो. अगर पढ़ना भी है तो हिजाब और नकाब की सौ शर्तों के साथ पढ़ो. इसी रूढ़िवादी सोच ने मुस्लिम लड़कियों को वकील, डॉक्टर, अफसर बनने से रोक कर रखा और उन्हें सिर्फ एक शरीर बना दिया जिसे हर हाल में ढंक कर रखना है. चमन आरा और शबिस्ता ने इसी दीवार को तोड़ा है और बताया है कि लड़की की जगह घर नहीं, कचहरी भी हो सकती है.
जब लड़की खुद कमाती है, पढ़ाती है, इलाज करती है या कोर्ट में केस लड़ती है तो वह सिर्फ अपने लिए ही नहीं जीती बल्कि हजारों लड़कियों के लिए एक उदाहरण बन राह दिखाती है. अगर यही दो बहने रूढ़िवाद की चादर ओढ़े रहती तो आज इन्हें कोई नहीं जानता लेकिन अब इन दोनों बहनों की पहचान उनके काले कोट से, उनकी डिग्री से और उनकी दलीलों से होगी. जब एक ही घर की दो बेटियां अदालत में खड़ी होकर संविधान, क़ानून और न्याय के लिए लड़ रही होंगी तो दूसरी बेटियों में भी हिम्मत आएगी कि हम भी कर सकते हैं. यही असली बदलाव है जो किताब से आता है, पर्दे से नहीं.
हिजाब जैसी रूढ़िवादी मानसिकता को धर्म के नाम पर मुस्लिम लड़कियों पर थोपा जाता है. हिजाब को लड़कियों को रोकने का हथियार बना दिया गया है. लड़की चाहे टॉपर बन जाए, वकालत पास कर ले, फिर भी समाज उसे हिजाब में ही रखना चाहता है. यानी उसकी पूरी मेहनत को एक कपड़े के टुकड़े से नाप दिया जाता है. यह सोच लड़कियों के दिमाग पर बोझ बनती है, अदालत में जब किसी गरीब महिला के लिए बहस करनी है, थाने में जाकर इंसाफ मांगना है तो वहां खुला दिमाग और तेज आवाज चाहिए. अगर दिमाग में ही यह डर चलता रहेगा कि मेरा दुपट्टा ठीक है या नहीं तो वह पूरी ताकत से कैसे लड़ेगी? कपड़ा सिर्फ कपड़ा होता है, उसे इज्जत का पैमाना बनाना गलत है. चमन आरा और शबिस्ता ने साबित कर दिया कि तरक्की हिजाब से नहीं, किताब से आती है और मुस्लिम समाज को अब अपनी बेटियों को पर्दे से नहीं, उनकी काबिलियत से देखना सीखना होगा. Muslim Women Success





