AI Poster Controversy: 9 सितंबर 2026 को अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के ऑफिशियल X हैंडल से एक AI पोस्टर डाला गया. इस एड में ट्रांसफॉर्मर जैसा बड़ा रोबोट दिखाया गया जिसके सामने एक दाढ़ी वाला, पगड़ी जैसा कपड़ा पहने एक भूरे रंग का आदमी था. नीचे अंग्रेजी में लाइन लिखी थी- “सड़क से दूर हो जाओ, तुम नहीं जानते की गाड़ी कैसे चलाते हैं, मिस्टर सिंह”
यहां सवाल यही है कि यह Mr Singh किसे कहा गया? अमेरिका में सड़क हादसों में दो-तीन ट्रक ड्राइवरों के भारतीय होने की खबर आई थी, ट्रंप सरकार ने उन्ही कुछ घटनाओं को आधार बनाकर पूरे भारतीय समुदाय को टारगेट बना दिया. ट्रम्प सरकार का कहना है कि कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस के नियम टाइट किए जाने को लेकर विज्ञापन था लेकिन पोस्टर में नियम की बात ही नहीं है, सीधे सरनेम पर हमला है इसीलिए हिन्दू अमेरिकन फाउंडेशन ने आपत्ति दर्ज करवाई और सिख कोआलिशन ने कहा कि अमेरिका में सिखों को 9/11 के 25 साल बाद भी पगड़ी देखकर दुश्मन समझा जा रहा है. Fox 7 Austin के एंकर Alec Nolan ने लिखा “मेरे दादा का नाम दान सिंह था, उनके पिता कथा सिंह थे जो भारत से आकर कैलिफोर्निया में किशमिश के किसान बने और ट्रक भी चलाया, यह पोस्टर मेरे परिवार को गाली है”
यह सबसे शुद्ध पाखंड है. ट्रंप खुद को ईसाई मूल्यों वाला राष्ट्रपति कहते है और उनकी सरकार का पोस्टर कह रहा है कि सरनेम देखकर तय करो कि कौन सड़क पर चलेगा? क्या यह धर्म के नाम पर नस्लवाद नहीं है? ट्रांसफॉर्मर फ्रेंचाइजी का जो रोबोट पोस्टर में दिखाया गया वह खुद कहानी में एलियन है, बाहर से आया हुआ है मतलब खुद एलियन बनकर दूसरे को बाहर वाला बता रहे हो. यही ट्रंपिज्म है. खुद जर्मन मूल के आप्रवासी परिवार से हो, खुद की पत्नी आप्रवासी है लेकिन सत्ता में आकर दूसरों को कहो निकल जाओ, नहीं तो अंजाम भुगतो. यह सड़क सुरक्षा नहीं, सामूहिक अपमान है. लाखों सिंह, हिंदू हैं, सिख हैं, अमेरिकन नागरिक हैं, सेना में हैं और ट्रक चला रहे हैं क्योंकि अमेरिका की सप्लाई चेन उन्हीं ट्रकों पर चलती है.
ट्रंप को लगता है AI से बना दिया तो मजाक लगेगा लेकिन सरकारी हैंडल से जब आप किसी समुदाय को स्टीरियोटाइप करते हो तो वह सिर्फ मीम नहीं रहता, वह राज्य की भाषा बन जाता है. कल कोई पुलिस वाला सड़क पर सिंह देखकर रोकेगा तो वह इसी पोस्टर को कोट करेगा इसीलिए बिलकुल गलत है और यह नया रेजिज्म भी है. पुराना रेजिज्म कहता था तुम काले हो इसलिए खराब हो. नया रेजिज्म कहता है तुम ट्रक नहीं चला सकते इसलिए देश छोड़ दो. शब्द बदल गए, अहंकार वही है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी व्यक्ति के अपराध या कानूनी स्थिति पर बात करने के बजाय उसकी पहचान को निशाना बनाना कितना सही है? “सिंह” भारत में बहुत आम उपनाम है और इसे किसी एक व्यक्ति की पहचान या अपराध से जोड़ना रेजिज्म ही है. अगर किसी ट्रक ड्राइवर ने कानून तोड़ा है या उसके पास अमेरिका में काम करने के जरूरी दस्तावेज नहीं हैं तो सरकार को उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन किसी समुदाय के आम नाम को लेकर ऐसा प्रचार करना बिलकुल गलत बात है. इससे यह संदेश जाता है कि समस्या किसी व्यक्ति के व्यवहार में नहीं बल्कि उसके नाम, मूल या प्रवासी पहचान में है. AI Poster Controversy





