Property Dispute: सिंधिया राजघराने में वर्षों से चल रहा अरबों रुपयों की संपत्ति का विवाद एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है. जिस पारिवारिक समझौते से एक लंबे कानूनी विवाद के समाप्त होने की उम्मीद की जा रही थी, वह फिलहाल टल गया है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उन की 3 बूआओं के बीच संपत्ति समझौते की प्रक्रिया उस समय उलझ गई जब परिवार की एक सदस्य प्रतिमा देवी ने अदालत में याचिका दाखिल की कि उन्हें प्रस्तावित बंटवारे में उचित हिस्सा नहीं दिया जा रहा है.

ग्वालियर की अदालत में परिवार की ओर से सुलह के लिए संयुक्त आवेदन प्रस्तुत किया गया था और समझौते पर अदालत की मुहर लगने ही वाली थी कि प्रतिमा देवी की ओर से दाखिल नए आवेदन ने पूरी प्रक्रिया पर विराम लगा दिया.

अरबों की संपत्ति पर वर्षों से विवाद

गौरतलब है कि सिंधिया परिवार देश के सब से प्रतिष्ठित पूर्व राजघरानों में गिना जाता है. परिवार के पास ग्वालियर सहित देश के विभिन्न शहरों में फैली विशाल अचल संपत्तियां हैं. इन में सब से चर्चित जय विलास पैलेस है, जिस की कीमत हजारों करोड़ रुपए आंकी जाती है. वर्तमान में इस महल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने परिवार के साथ रहते हैं. जबकि इस के एक हिस्से में उन की बूआ यशोधरा राजे सिंधिया रहती हैं.

इसी संपत्ति के बंटवारे को ले कर लंबे समय से कोर्ट में कई मामले चल रहे हैं. हाल के दिनों में परिवार ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने की पहल की थी, जिस से यह उम्मीद जगी थी कि वर्षों पुराना कानूनी संघर्ष खत्म हो सकता है. मगर इसी बीच प्रतिमा देवी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि प्रस्तावित फैमिली सेटलमैंट में उन के अधिकारों की अनदेखी की गई है. उन्होंने यह भी दावा किया कि उन के नाम से अदालत में प्रस्तुत की गई पावर औफ अटौर्नी की वैधता 24 जून तक ही थी, लेकिन उस के बाद भी उसी दस्तावेज का इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया में किया गया.

बताते चलें कि प्रतिमा देवी, ज्योतिरादित्य सिंधिया की सब से बड़ी बूआ पद्मावती राजे की बेटी हैं. पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के पूर्व राजपरिवार में हुआ था. इस संपत्ति विवाद में प्रतिमा देवी के साथ उन की बहन कनिका देवी भी पक्षकार हैं.

अब आगे क्या

प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद अदालत ने फिलहाल समझौते की प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है. कोर्ट में अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत परिवार के प्रस्तावित समझौते को आगे बढ़ाने की अनुमति देती है या प्रतिमा देवी द्वारा उठाए गए कानूनी प्रश्नों पर पहले विचार किया जाएगा. फिलहाल, सिंधिया राजघराने का यह बहुचर्चित संपत्ति विवाद, जो खात्मे की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था, एक बार फिर कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है. Property Dispute

 

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